फसलों की सेहत सुधारेगा डॉ. ड्रोन, जानिए कैसे?

आने वाले समय में ड्रोन फसलों की रखवाली करता नजर आएगा। यह खेतों की तस्वीर लेकर बीमारी के बारे में बताएगा। फिर उसके अनुसार खेत में कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप फसलों की सेहत में सुधार होगा। एग्रोटेक-2016 में कृषि क्षेत्र से जुड़ी देश-विदेश की कंपनियों ने जहां अपने उत्पाद प्रदर्शित किए हैं, वहीं संभवत: भारत में पहली बार खेत और फसल पर नजर रखने के लिए किसानों को ड्रोन के इस्तेमाल से रूबरू कराया जा रहा है।

आईआईटी खड़गपुर (प. बंगाल) द्वारा तैयार स्मार्ट ड्रोन तकनीक से पंजाब और हरियाणा से किसान अपने खेतों की तस्वीरें लेकर संबंधित कंपनी को भेज सकेंगे, जो फसल की स्थिति का आकलन कर उसके लिए खाद, कीटनाशक आदि की जरूरत की जानकारी मुहैया कराएगी।

इससे किसानों को खेत में अपनी फसल के भीतर किसी पौधे पर पनप रही बीमारी का पता लगाने में आसानी होगी और समय पर निदान भी किया जा सकेगा। ड्रोन तकनीक की जानकारी देते हुए ऐजनेक्स्ट के एमडी तरन सिंह ने बताया कि विदेशों में यह तकनीक किसानों द्वारा अपनाई जा चुकी है।

वे अपने खेतों की देखरेख के साथ ही फसल पर मौसम के प्रभाव, कीटों के हमलों, कमजोर फसल जैसी समस्याओं के प्रति ड्रोन के जरिए तुरंत सतर्क हो जाते हैं। इस तरह समय पर उपचार मिलने से फसल भी अच्छी होती हैं।

45 मिनट हवा में रह सकता है ड्रोन

एग्रोटेक में प्रदर्शित किए गए ड्रोन के बारे में तरन सिंह ने बताया कि एक बार उड़ान भरने के बाद 45 मिनट तक हवा में रह सकता है और इस दौरान इसमें लगे कैमरों से रिमोट के जरिए ही काम लिया जा सकता है।

इससे फोटो और वीडियो दोनों लिए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि ड्रोन के जरिए खेतों के अलावा बड़े बागानों और पशु फार्मो पर भी नजर रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारत में खेती के डिजिटलाइजेशन की ओर कदम बढ़ाया गया है।

बड़े रकबे वाले खेतों में कारगर

यह तकनीक बड़े रकबे वाले खेतों में ज्यादा कारगर है क्योंकि बड़े खेतों में किसान के लिए हर पौधे पर नजर रख पाना संभव नहीं होता। उन्होंने बताया कि इस ड्रोन की कीमत 20 हजार रुपये से आरंभ होती है जो विभिन्न तकनीकों से लैस अलग-अलग ड्रोन के लिए भिन्न है। किसान ड्रोन किराए पर लेकर भी काम कर सकते हैं।

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