…ऐसा कर हरियाण सरकार ने किसानों को दुविधा में डाला

हरियाणा सरकार ने सरसों की खेती करने वाले कृषकों के सामने फसल बेचने की बड़ी चुनौती रख दी है। उन्हें ई-खरीद पोर्ट https;//ekharid.in पर पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि पोर्टल पर गलत सूचना अपलोड न करें। जाहिर है, यदि किसान ई-खरीद पर सूचनाएं अपलोड करने में गलती करता है तो उसकी फसल की खरीद में दिक्कत आ सकती है। दरअसल, चुनावी सीजन में किसानों को लुभाने के चक्कर में हरियाणा की मनोहर लाल सरकार यह भूल गई कि सूबे के साधरण किसान इतने स्मार्ट नहीं कि वे अपनी अफसल की खरीद-फरोख्त ई-माध्यम से कर सकें। इसलिए ऐसे तमाम प्रयासों का निरंतर विरोध भी हो रहा है। इसके बावजूद प्रदेश के कृषि तथा कल्याण विभाग की ओर से 1 फरवरी को अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कर किसानों से कहा गया है कि सरकार की ओर से सरसों की खरीद के लिए ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ नाम से योजना शुरू की गई है। इसके तहत ई-खरीद पोर्टल पर सरसों फसल से संबंधित तमाम जानकारियां अपलोड करनी होंगी। किसानों को रबी 2018-19 में बोई गई फसलों की ऑनलाइन रिजस्ट्रेशन कराने पर 10 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से उनके खाते में प्रोत्साहन राशि डालने का लालच भी दिया गया है। अखबारों में छपे विज्ञापन में बताया गया है कि इस पोर्टल को इंटरनेट या गांव के कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से खोला जा सकता है। ऑफ लाइन जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण अधिकारी गांवों मंें जाकर किसानों से सूचनाएं एकत्रित करेंगे। पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की आखरी तारीख 8 फरवरी 2019 बताई गई है।
सवाल यह है कि यदि कृषि अधिकारी गांवों में जाकर किसानों से फसल की जानकारी एकत्रित करेंगे तो फिर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन का फंडा क्यों ? क्या इस लिए कि प्रदेश सरकार जताना चाहती है कि हरियाणा के किसान कितने मॉर्डन हैं? ऐसे में ई-खरीद की सरकार की योजना पर भी सवालिया निशान लगता है। सरकार की इस दोहरी पहल से किसान दुविधा में हैं।

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