कृषि कचरा जलाने के दोषियों से वापस ली जा सकती है सरकारी सहायता, एनजीटी में सुनवाई आज

कृषि कचरा जलाने से प्रदूषण फैलने के मामले में दिल्ली का राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) बुधवार को कड़े फैसले ले सकता है। इसके दोषी किसानों से सरकारी सहूलियतें छीनने के बारे में कड़ी हिदायतें दी जा सकती हैं।
खेतों का कचरा और फसलों के अवशेष जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुक्सान को लेकर एनजीटी गंभीर है। इस बारे में एक याचिका को लेकर दिल्ली और इससे सटे चार प्रदेशों की सरकारों को कई हिदायतें दी गई थीं। उसका कितना अनुपालन हो रहा है, इसकी समीक्षा की जानी है।
एनजीटी ने दिल्ली सरकार और इससे लगते चार राज्यों को 16 मार्च को कटाई के मौसम के बाद फसल जलने से प्रदूषण को रोकने के संबंध मंे कार्रवाई को लेकर कई हिदायतें दी थीं। एनजीटी पूर्व में ही फसल जलाने की घटना को लेकर पर्यावरण मुआवजे की राशि तय कर चुका है। दोषी पाए जाने पर दो एकड़ के किसानों को ढाई हजार, दो़ से अधिक और पांच एकड़ से कम के किसानों को पांच हजार और पांच एकड़ से अधिक के किसनों को पंद्रह हजार रुपये बतौर जुर्माना अदा करने होंगे। एनजीटी ने पांचों राज्य सरकारों को हिदायत दी है कि जुर्माना अदा करने में आना-कानी करने वाले किसानों से तमाम सरकारी सहायता वापस ली जाएं। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि एनजीटी के हरियाणा पैनल ने पांच राज्यों राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली को कृषि फसल जब्त करने के बारे में नोटिस जारी करने की भी हिदायत दी है। नोटिफि़केशन कड़ाई से लागू करने और बकाएदारों के खिलाफ उचित कार्रवाई की भी हिदायत दी गई है। इस बारे में याचिका दायर करने वाले पर्यावरणवादी विक्रांत टोंआंग ने खुले में कृषि कचरे और अवशेष जलाने होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने के संबंध में एक याचिका दायर की हुई है।।

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