चुनावी वर्ष के मददेनजर उच्च कृषि विकास दर के लिए सरकार ने बनाई रणनीति

मलिक असगर हाशमी
तकरीबन डेढ़ वर्ष बाद लोकसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में केंद्र की भाजपा सरकार चुनावी वर्ष में कृषि क्षेत्र में कुछ बेहतर करने के मूड में है। आधा से अधिक भारत देहात में रहता है। ऐसे में किसानों को लुभाने की खातिर किए गए प्रयास सफल हुए तो 2019 में भी भाजपा के दरवाजे लोकसभा के लिए खुले रह सकते हैं। एक दिन पहले केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने 2017-18 वित्तीय वर्ष के लिए देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकल घरेलू उत्पाद(जीडीपी) और सकल मूल्य वर्धन(जीवीए) का जो अग्रिम अनुमान जारी किया है। उससे भी इसका आभास होता है।
कृषि सहित अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों के लिए जीवीए बढ़ाए गए हैं। 2017-18 के लिए कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन के लिए जीवीए 2.1 प्रतिशत अनुमानित रखा गया है। 2016-17 में ये अनुमान 4.9 प्रतिशत था। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने कृषि क्षेत्र के विकास दर पर त्वरित विचार विमर्श किया ताकि सुनिश्चित हो सके कि वर्ष 2017-18 की समाप्त होने तक उच्च वृद्धि दर के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। आर्थिक गतिविधियों कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन और उनके अनुमानित जीवीए शेयर फसल 60 प्रतिशत, पशुधन 20 प्रतिशत,वानिकी और लॉगिंग 8.5 प्रतिशत तथा मत्स्य पालन और जलीय कृषि 5.5 प्रतिशत रखे गए हैं। फसल क्षेत्र में कृषि और बागवानी दोनों शामिल हैं, जिनमें खाद्यान्न मुख्य है।
सीएसओ द्वारा जारी अग्रिम अनुमान, कृषि और किसानों के कल्याण मंत्रालय, अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) द्वारा साझा किए गए फसलों के कवरेज और अनुमानित उत्पादन के आंकड़ों पर आधारित बताया गया है। डीईएस ने अगस्त 2017 तक संकलन के आधार पर खाद्यान्न, तिलहन और वाणिज्यिक फसलों के संबंध में खरीफ 2017-18 के लिए एरिया कवरेज और उत्पादन पर डेटा साझा किया है। डीईएस द्वारा ये अनुमान राज्य सरकारों द्वारा किए गए अनुमानों पर आधारित है।
बागवानी फसलों के संबंध में फसल क्षेत्र के एक अन्य महत्वपूर्ण घटक क्षेत्र कवरेज(एरिया कवरेज) और उत्पादन अनुमान से संबंधित डेटा को कृषि मंत्रालय के बागवानी सलाहकार ने सीएसओ के साथ साझा किया था। यह जानने में मदद मिलेगी कि देश के कुछ हिस्सों में मानसून की शुरुआत में देरी से अगस्त 2017 तक खरीफ में विभिन्न फसलों के क्षेत्र में कवरेज पिछले वर्ष से नीचे था। इसके बाद अच्छी बारिश मंत्रालय को खरीफ के लक्ष्य के अनुसार क्षेत्र की कवरेज बढ़ाने में मदद मिली। मानसून की शुरुआत में देरी के बावजूद और पिछले वर्ष की तुलना में अपेक्षाकृत कम बारिश से, खरीफ के तहत एरिया कवरेज अंतत:106.55 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंच गया। जब कि पांच वर्षों का औसत एरिया कवरेज105.86 मिलियन हेक्टेयर था।
बागवानी के मामले में, क्षेत्र कवरेज (एरिया कवरेज) और उत्पादन दोनों के संबंध में समान सकारात्मक प्रवृत्ति दिसंबर 2017 तक देखी गई। फल और सब्जियों के तहत पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार क्षेत्र कवरेज 24.92 मिलियन हेक्टेयर पर है। पिछले वर्ष के अंतिम आंकडों में ये 24.85 मिलियन हेक्टेयर थी। इसके अनुरूप, पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक बागवानी उत्पादन पिछले वर्ष (2016-17) में 300.6 मिलियन टन की तुलना में 305.4 मिलियन टन है। कृषि गतिविधियों के भार में 60प्रतिशत से अधिक खाद्यान्न, तिलहन, वाणिज्यिक फसलों और बागवानी का है जिन्हें समग्र तौर पर कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन के नाम से जाना जाता है। लिहाजा फसलों के संबंध में मूल्य समग्र रुप से अनुमान को सकारात्मक या नकारात्मक तौर से प्रभावित करने के लिए बाध्य है। इसलिए ये तर्कसंगत है कि अगस्त 2017 के अनुसार फसलों के क्षेत्र कवरेज के आधार पर गणना समग्र कृषि क्षेत्र के लिए अनुमानित अनुमान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा हो। जीवीए में सकारात्मक बढ़त देखने को मिलेगी। यदि दिसंबर 2017 तक क्षेत्र कवरेज में बढ़ोतरी के साथ खाद्यान्न, तिलहन और वाणिज्यिक फसलों के उत्पादन अनुमान को शामिल किया जाए। जीवीए कम्प्यूटेशन में बागवानी से ज्यादा हिस्सेदारी खाद्यान्न, तिलहन और वाणिज्यिक खेती की है। इसके साथ ही बागवानी में उच्च उत्पादकता अनुमान नजर आ रहा है।
कृषि मंत्रालय का मानना है कि मानसून के शुरू होने में देरी से अगस्त 2017 तक निम्न क्षेत्र कवरेज, दिसंबर 2017 तक वास्तविक जमीनी स्थित की तुलना में खराब तस्वीर में पेश किया। अनुमान से स्पष्ट है कि अगस्त 2017 के आधार पर कृषि जीवीए की गणना में कम या ऋणात्मक अंशदान के बावजूद विकास दर अभी भी 2.1 प्रतिशत पर काम कर रही है। यह पशुधन और मत्स्य पालन क्षेत्रों में उच्च विकास दर का एक रूप है,जो कृषि क्षेत्र के दो अन्य घटक हैं। यदि इस संशोधन और वास्तविक क्षेत्र की स्थिति को कृषि क्षेत्र के लिए जीवीए की गणना में ध्यान में रखी गई है, तो विकास दर का अग्रिम अनुमान 2.1 प्रतिशत के मुकाबले बहुत अधिक हो सकती है।
मंत्रालय उच्च विकास दर हासिल करने के बारे में आशावादी है, क्योंकि रबी, 2017 में खरीफ 2017 के अतिरिक्त बेहतर प्रदर्शन दिखाई दे रहा है। 5 जनवरी, 2018 तक रबी के तहत क्षेत्र का कवर 58.6 मिलियन है, जो बहुत बेहतर है। रबी की बुवाई फरवरी के पहले सप्ताह तक चलती है। फसल के तहत कुल क्षेत्रफल और परिणामस्वरूप उत्पादन बहुत अच्छा होगा। कुल मिलाकर 2017-18 में फसल क्षेत्र में क्षेत्रीय कवरेज पांच साल के औसत से अधिक है। मंत्रालय2016-17 के दौरान हासिल किए गए रिकॉर्ड उत्पादन को उच्च उत्पादकता के जरिए आगे भी जारी रहने की उम्मीद करता है। वर्ष 2017-18 के लिए उपलब्ध कराया गए ऋण 10 लाख करोड़ हैं जबकि 2016-17 में ये राशि 9 लाख करोड़ रुपये थी। मंत्रालय किसानों को ऋण की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए सभी राज्य सरकारों के साथ आगे बढ़ रहा है जो कि उच्च उत्पादकता हासिल करने के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट है। वर्ष 2017-18 के लिए अग्रिम अनुमान पिछले वर्ष में 4.9 प्रतिशत के बहुत मजबूत जीवीए के पीछे आता है। यह ध्यान में रखते हुए कि फसल खंड जीवीए कंप्यूटेशन का एक प्रमुख घटक हैं। इसका प्रदर्शन बहुत महत्वपूर्ण है। हालांकि, जहां जमीन की कमी की वजह से औसत क्षेत्र कवरेज में वृद्धि की संभावना कम है, लिहाजा उत्पादकता में वृद्धि महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से फसलों और सामान्य रूप से कृषि मानसून और मौसम की संपूर्ण स्थिति पर निर्भर हैं। मौसम में छोटे बदलाव कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, उदाहरण के लिए, अगस्त 2017 तक क्षेत्र के कवरेज में देखा गया है। इसलिए मंत्रालय फसलों सहित सभी क्षेत्रों में उच्च उत्पादकता प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। मिट्टी के स्वास्थ्य कार्ड, एनएफएसएम, एमआईडीएच, पीएमकेएसवाई, पीएमएफबीवाई, ई-एनएएम, उच्च क्रेडिट टोकरी और उर्वरक समेत सभी अन्य निविष्टियों के प्रबंधन सहित इसके पहल, फसल जोखिम कवर के लिए मजबूत पीएमएफबीवाई के अलावा उच्च उत्पादकता को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। कई राज्यों ने पहले ही दालों और तिलहनों सहित खरीफ की खरीद के लिए अनुरोध किए हैं। ये अनुरोध विभिन्न राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, यूपी, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश आदि से आया है। मंत्रालय ने पहले ही 22 लाख मीट्रिक टन मूल्य के खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। यह पिछले साल की खरीद से अधिक है। इसके अलावा, मध्यप्रदेश भावन्तर भुगान योजना के तहत अपना खुद का संचालन कर रहा है। कर्नाटक, तेलंगाना आदि से तूर (अरहर) खरीद के लिए अनुरोध शुरू हो जाएंगे। जहां फसल विकास अत्यधिक मजबूत है वहां से उच्च उत्पादकता की उम्मीद है। इसलिए, 2017-18 के लिए अंतिम अनुमानित आंकड़े जारी होने पर कृषि क्षेत्र में बहुत अधिक जीवीए दर्ज करने की उम्मीद की जा सकती है।

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