चिप्स कंपनियों की पसंद वाला गांव कैंसर की चपेट में… अब होगा सर्वे

कम स्टार्च वाले आलू की खेती के लिए चर्चित और देशी.विदेशी चिप्स कंपनियों की पहली पसंद इंदौर जिले के हरसोला गांव में पिछले पांच साल में कैंसर के 25 मामले सामने आने से प्रशासन के माथे पर बल पड़ गया है। गांव के 15 किसानों की अब तक कैंसर से मौत हो चुकी है, जिसे लेकर प्रशासन ने करीब 9,200 की आबादी वाले गांव का विशेष सर्वेक्षण कराने का फैसला लिया है। गैर सरकारी क्षेत्र के इंदौर कैंसर फाउंडेशन के मानद सचिव दिग्पाल धारकर ने बताया कि हमारे द्वारा सरकारी…

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मोदी सरकार का एक और ‘किसान पटाउ’ कदम, गन्ने का लाभकारी मूल्य 20 रुपये बढ़ाया

चुनावी वर्ष में किसानों पर राहत की बारिश हो रही है। केंद्र सरकार ने एक बार फिर कृषक वर्ग को सुकून देने वाला सामाचार सुनाया है। इस दफा देश के गन्ना किसानों को राहत देने का ऐलान किया गया है। केंद्रीय कैबिनेट ने फसल की कीमत में बढ़ोतरी का फैसला लेते हुए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी 20 रुपये प्रति कुंतल बढ़ा दिया है। नरेंद्र भाई मोदी के कैबिनेट के इस फैसले से गन्ना कीमत 255 रुपये प्रति कुंतल से बढ़कर 275 रुपये प्रति कुंतल हो जाएगी।…

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अब कई फ्लेवर में मिलेगी आदिवासियों की शराब…कैसे, यहां पढें

आदिवासियों का प्रिय पेय ‘महुआ’ यानी लोकल मदिरा जल्दी ही अलग.अलग फलों के फ्लेवर में बाजार में मिलने लगेगी। ट्राइबल कॉपरेटिव मार्केटिंग डेवलेपमेंट फेडरेशन आफ इंडिया ;ट्राइफेडद्ध आदिवासियों की वित्तीय सेहत सुधारने के लिए आइआइटी दिल्ली के साथ मिल कर आदिवासियों के इस पेय को तरह.तरह के फ्लेवर के साथ बाजार में उतारने की तैयारी में है। सब कुछ सही रहा और लाइसेंस आदि मिल गया तो तीन चार महीने में ये बाजार में उपलब्ध होगी । ट्राइफेड भारत के आदिवासियों की आर्थिक हालत सुधारने और उनकी आमदनी बढ़ाने के…

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अब टायर कंपनियां किसानों को झटका देने की तैयारी में….क्योंकि

देेश के किसान चौतरफा मुसीबतों से घिरे हैं। कभी प्राकृतिक आपदा उन्हें परेशानी में डाल देती है तो कभी सरकारी नीतियां उनका दम निकाल देती हैं। डिजल की बढ़ती कीमतों से भी कृषि कार्यों पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। रही-सही कसर अब टायर कंपनियां निकालने की तैयारी में हैं। जल्द ही टायरों की कीमत डेढ़ से तीन गुना बढ़ने वाला है। इससे ट्रैक्टरों के टायर और जोत और कटाई में काम आने वाले वाहनों के टायरों की खरीद पर सीधा असर पड़ेगा। आल इंडिया टायर डीलर्स फेडरेशन का कहना है…

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ब्रेकिंग न्यूज: कच्चे जूट का समर्थन मूल्य बढ़ा-जानिए कितना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में 2018-19 के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि का निर्णय लिया गया है। पिछले वर्ष के मुकाबले प्रति क्विंटल 200 रूपये की बढ़ौतरी की गई है। औसत क्वालिटी (एफएक्यू) के कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3,700 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। 2017-18 में समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल 3,500 रुपये था। सरकार की ओर से कहा गया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ौतरी से किसानों को बेहतर लाभ मिलेगा। उनकी…

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आजमा कर देखिए….कुक्कुट पालन में मिलेगी राहत और स्वच्छ रहेगा पर्यावरण

गर्मियों में मुर्गी पालन जोखिम भरा काम है और पराली, धान के पुआल और गन्ने के पत्ते स्वच्छ पर्यावरण की राह का बड़ा रोड़ा। मगर थोड़ी सी समझदारी दोनों ही मसलों का हल निकाल सकती है। कृषि वैज्ञानिकों एवं पर्यावरणविदों की मानें तो पुआल, पराली और गन्ने के पत्ते का होशियारी और समझदारी से प्रबंधन कर गर्मियों में कुक्कुट पालन को होने वाले नुक्सान से बचाया जा सकता है, साथ ही फसलों के इन अवशेषों का सही इस्तेमाल कर पर्यावरण को नुक्सान होने से रोका जा सकता है। वैज्ञानिक कहते…

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अगले दो महीने तक मछली नहीं खा पाएंगे दक्षिण भारत के लोग, क्यों कि….

दक्षिण भारत मंें मछलियों की कीमत में भारी उछाल की संभावना है। अगले दो महीने तक मछली के शौकीनों एवं इसके व्यापारियों को मुसीबत झेलनी पड़ सकती है, क्यों कि तमिलनाडु और पुड्डूचेरी के पूर्वी तट पर गहरे पानी में मछली पकड़ने पर शनिवार रात से 61 दिवसीय वार्षिक प्रतिबंध शुरू हो गया है। इसका सीधा प्रभाव मछली की कीमतों पर पड़ेगा और इसके शौकीनों केा इसके बदले मोटी रकम चुकानी पड़ेगी । यह प्रतिबंध 15 जून तक प्रभावी रहेगा। इस बीच 56 सौ बड़ी मशीनी नौकाएं राज्य के 13…

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कृषि आधुनिकीकरण में कॉरपोरेट घराने की हिस्सेदारी नहीं

कृषि प्रधान प्रदेश हरियाणा के 90 लाख हेक्टेयर में खेती होने के बावजूद कृषि कार्यों एवं इसके उत्पादों को उन्नत बनाने में किसी कॉरपरेट घराने की अब तक न कोई हिस्सेदारी रही है और न ही दिलचस्पी। किसानों और प्रदेश सरकार की तरह यह वर्ग भी गेहूं, चावल के उत्पादन को घाटे का सौदा मानता हैं, इसलिए कुछ क्षेत्र में कान्ट्रैक्टर फार्मिंग से आगे इस वर्ग ने सोंचा ही नहीं। औद्योगिक संगठन एसोचैम के डायरेक्टर दिलीप शर्मा कहते हैं,‘‘कॉरपोरेट घराना कोई भी काम बिना लाभ-हानि के नहीं करता। प्रदेश सरकार…

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‘‘इसा मेला तो कितै भी ना देखा, जित घुमाई की घुमाई और पढ़ाई की पढ़ाई।’’

यह कहना था गांव ददलाना से तृतीय कृषि नेतृत्व शिखर मेला देखने आई रीना का। रीना ने बताया कि उसके साथ आई महिलाएं भी यह मेला देखकर काफी प्रसन्न हैं। हरियाणा सरकार द्वारा कृषि उद्यमी कृषक विकास चैंबर के सहयोग से रोहतक में आयोजित किए गए तीन दिवसीय किसान मेला में जनसमुदाय का रेला आज अंतिम दिन भी थमने का नाम नहीं ले रहा था। हर किसी के जुबान पर एक ही बात थी कि काश यह मेला एक-दो दिन और चलता तो यहां से और ज्ञानवर्धक जानकारी लेकर जाते।…

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खेतों से गायब हो गयी कठिया गेहूं की पैदावार

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर समेत समूचे बुन्देलखण्ड क्षेत्र में दैवीय आपदाओं के कहर से कठिया गेहूं के लाले पड़ गये हैं। किसी जमाने में यहां का किसान कठिया गेहूं की पैदावार ही करता था। कम पानी और बिना रसायनिक खाद के पैदा होने वाला लाल रंग का गेहूं (कठिया गेहूं) सेहत के लिये सबसे मुफीद अनाज माना जाता है मगर अब इसकी पैदावार का दायरा सिमट गया है। गेहूं की तमाम प्रजातियां आने के बाद भी औषधीय गुणों की वजह से बुन्देलखण्ड क्षेत्र के कठिया गेहूं की पहचान देश और…

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