गोतस्कर बताकर मौत के घाट उतारे की घटना मेवात के दुग्ध कारोबा को बर्बाद करने की साजिश ….कैसे…यहां पढें

पिछले चौदह महीने में चार पशुपालकों की पीटकर मौत के घाट उताराना कहीं हरियाणा के मेवात के दूध के कारोबार को बर्बाद करने की साजिश तो नहीं ? चार दिन पहले राजस्थान के अलवार में मेवात क्षेत्र के कोल गांव के दूध का कारोबार करने वाले रकबर उर्फ अकबर की पिटाई से मौत के बाद यह सवाल शिद्दत से उठाया जाने लगा है। इसके तुरंत बाद राजस्थान से लगते हरियाणा के तावड़ू उपमंडल के गांव कोट-बिस्सर के बीच फिरोजपुर झिरका के इब्राहिम बास के हासम को गोतस्कर बताकर आठ-दस लोगों ने पीट दिया। बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं से जहां इन कयासों को बल मिला है, वहीं मेवात के दूधिए दहशत में हैं। ऐसी घटनाएं इनके कारोबार पर दुष्प्रभाव डालने लगी हैं।
तकरीबन दो दशक पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से अरावली की पहाड़ियों में खनन पर प्रतिबंध लगाने के बाद मेवात क्षेत्र के लोगों के लिए दूध का कारोबार रोजी-रोटी का बड़ा सहारा बना हुआ है। पहले इलाके के अधिकांश लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से खनन कार्य से जुड़े थे। इलाके में सिंचाई के माकूल स्रोत नहीं होने, भूगर्भीय जल खारा होने, समुचित बारिश नहीं होने, हर वर्ष सूखे की मार झेलने और क्षेत्र में नाम मात्र का भी उद्योग नहीं होने के चलते मेवात की बड़ी आबादी पशुपालन पर निर्भर करने लगी है।
हुड्डा सरकार में इंडस्ट्रियल टाउनशिप बसाकर मेवात के लोगों को रोजगार दिलाने का प्रयास किया गया था, पर चूंकि हरियाणा का यह इलाका बेहद पिछड़ा और बुनियादी सुविधाओं से महरूम है, इसलिए मेवात आने में किसी उद्योगपति ने दिचस्पी नहीं दिखाई। गर्ज यह कि यदि मेवातियों से दूध का कारोबार छिन जाए तो इनके लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ मुश्किल हो जाए। अरावली की तलहटी में बसे अधिकांश गांवों के लोग गायों के दूध का कारोबार करते हैं। इलाके के लोगों ने बताया कि भैंस पालना गाय से महंगा पड़ता है। गायों को दूध निकाले के बाद वे अरावली की पहाड़ियों में छोड़ दिया जाता है जिससे उनका चारा-पानी का पैसा बच जाता है। भैंस के मुकाबले गायों के दूध की कीमत थोड़ा कम मिलती है। इसके बावजूद मेवात वासी गाय पालना लाभदायक मानते हैं। पूर्व मंत्री तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चौधरी आफताब कहते हैं-‘‘मेवात को सांस्कृतिक, सामाजिक तौर पर बदनाम करने की लंबे समय से साजिश हो रही है। यहां तक कि मेवात क्षेत्र का कोई भी अपराधी पकड़ा जाए तो उसे ‘मेवाती गैंग’ का बताकर सारे मेवातियों को शर्मशार करने का प्रयास किया जाता है। अब मेवात के दूध के कारोबार को मिटाने की चाल चली जा रही है।’’
एक अनुमान के मुताबिक, मेवात के पशुपालकों के पास करीब 50 हजार गाएं हैं। मृतक रकबर के कोल गांव के पशुपालकों के पास करीब 1000 गाएं हैं। झिमरावट,घागस, करहेड़ा, कोटला, नगीना, पाटखोरी,मालब,अकेड़ा,कंसाली,चांदनकी,खेड़ी कलां, मरोड़, ढाणा,बुबनहेड़ी, महूं, शेखपुर आदि मेवात के गांव गोपालकों एवं दूध के कारोबार के लिए काफी चर्चित हैं। तीन साल पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर यहां के 100 गोपालकों को सम्मानित कर चुके हैं। मेवात के मवेशी पालक डेयरी सोसायटियों एवं दूधियों के माध्यम से दूध-घी का कारोबार करते हैं। राजस्थान का अलवर सांस्कृतिक, सामाजिक तौर पर बेहद करीब है, इसलिए मेवात के पशुपालक अपने मवेशियों की खरीदारी अलवर-भरतपुर से ही करते हैं। मेवात का ज्यादातर दूध इससे लगते राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा के करीबी शहरों एवं दिल्ली में सप्लाई किया जाता है। जैसे-जैसे मेवात में दूध का कारोबार विस्तार ले रहा है, गोतस्कर बताकर हिंसक हमला करने की घटना बढ़ती जा रही है। अलवर से कांग्रेस सांसद करण सिंह यादव ने चालू मानसून सत्र में इसपर चिंता प्रकट किया है।
-मलिक असगर हाशमी
file photo(w/t firstpost)

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