ड्रोन करेंगे फसलों की निगरानी, जीपीएस नियंत्रित ट्रैक्टर से होगी जुताई

आने वाले समय में फसलों की सेहत की निगरानी स्मार्ट ड्रोन के जरिए और खेतों की जुताई जीपीएस नियंत्रित स्वचालित ट्रैक्टरों से होगी। खेतों में कब और कितना कीटनाशक, उर्वरक का उपयोग करना है तथा मृदा को बेहतर बनाने के तरीके जैसी चीजें की जानकारी सही समय पर किसानों को आसानी से उपलब्ध हो सकती हैं। यह सब कृत्रिम मेधा ;आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य संबंधित प्रोद्योगिकी के उपयोग से संभव होगा। नीति आयोग ने कृत्रिम मेधा के लिए राष्ट्रीय रणनीति पर जारी परिचर्चा पत्र में कहा है कि कृत्रिम मेधा के उपयोग से खेती.बाड़ी के सभी स्तरों पर दक्षता बढ़ेगी। फसलों की उत्पादकता के साथ किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इसमें कहा गया है कि इस प्रौद्योगिकी के तहत इमेज रिकाग्नीशन और डीप लर्निंग मॉडल के जरिए खेतों की तस्वीर और अन्य आंकड़े लेकर मृदा स्वास्थ्य के बारे में पता लगाया जा सकता है। किसान उसे बेहतर करने के लिए जरूरी कदम उठा सकते हैं। इसके लिए प्रयोगशाला परीक्षण संबंधी ढांचागत सुविधा की आवश्यकता नहीं होगी।
इसके अलावा एआई प्रौद्योगिकी का उपयोग बुवाई, कीटनाशक नियंत्रण, कच्चे माल का जरूरत के हिसाब से उपयोग में किया जा सकता है। साथ ही ई.नाम ;इलेक्ट्रानिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केटद्ध, एजीमार्केट तथा मृदा स्वास्थ्य नमूने आदि के आंकड़ों के आधार पर एआई उपकरण किसानों को मांग एवं आपूर्ति का सटीक आंकड़ा उपलब्ध करा सकते हैं। इससे बिचौलियों का सफाया होगा और बेहतर जानकारी से किसानों की आमदनी बढ़ेगी वहीं खेती करना भरोसेमंद होगा। कुल 115 पृष्ठ के इस परिचर्चा पत्र में आयोग ने कृषि के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, स्मार्ट शहर, स्मार्ट वाहन एवं परिवहन के क्षेत्रों में कृत्रिम मेधा के उपयोग पर जोर देने का फैसला किया है। उसका कहना है कि शिक्षा क्षेत्र में इस दूरगामी प्रभाव वाली प्रौद्योगिकी के उपयोग से शिक्षण.प्रशिक्षण की पहुंच बढ़ेगी और गुणवत्ता बेहतर होगा।
आयोग के अनुसार, हालांकि कृत्रिम मेधा ;एआईद्ध के उपयोग के रास्ते में कुछ चुनौतियां हैं। इसमें एआई के उपयोग और अनुसंधान में व्यापक आधार पर विशेषज्ञता की कमी, बेहतर आंकड़ों तक पहुंच का अभावए उच्च संसाधन लागत तथा एआई के उपयोग के लिए जागरूकता की कमी, आंकड़ों की गोपनीयता को लेकर औपचारिक नियमन का अभाव समेत निजता एवं सुरक्षा का मुद्दा तथा एआई को अपनाने को लेकर सहयोगपूर्ण रुख का अभाव शामिल हैं।
परिचर्चा पत्र में देश में एआई के क्षेत्र में अनुसंधान को गति देने के लिए दो स्तरीय ढांचा का प्रस्ताव किया गया है। पहला, मौजूदा प्रमुख शोध की बेहतर समझ विकसित करने तथा प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने के लिए सेंटर आफ रिसर्च एक्सीलेंस ;सीओआरईद्ध तथा दूसरा एप्लिकेशन आधारित अनुसंधान को आगे बढ़ाना तथा उसके उपयोग की जि मेदारी के साथ इंटरनेशनल सेंटर्स आफ ट्रांसफार्मेशनल एआई ;आईसीटीएआईद्ध का गठन। परिचर्चा पत्र में कहा गया है कि देश में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की क्षमता को देखते हुए भारत एआई के क्षेत्र में एक प्रमुख देश बन सकता है और दुनिया के 40 प्रतिशत देशों ;उभरते औेर विकासशील देशद्ध को यह प्रौदोगिकी उपलब्ध करा सकता है।

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