अगले वित्त वर्ष से मनरेगा पर सॉफ्टवेयर की मदद से कैसे रखी जाएगी नजर, पढ़ें…..

महात्मा गांधी राष्ट्री य ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना यानी मनरेगा में गड़बड़ झाला रोकने को अगले वित्त वर्ष से फुल प्रूफ सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। सॉफ्टवेयर की मदद से इसपर निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए प्रशिक्षण का कार्य भी चल रहा है। 1 अप्रैल, 2018 से मनरेगा के अंतर्गत सभी अनुमान कार्यक्रम प्रबंधन के लिए सिक्योधर सॉफ्टवेयर का इस्तेएमाल किया जाएगा। इस तकनीक से टिकाऊ परिसम्पकत्ति का सृजन करके ग्रामीण आजीविका संसाधन आधार को मजबूत बनाया जाएगा । कार्यक्रम में गुणात्मक तरीके से सुधार लाने के लिए समर्पित मनरेगा कर्मियों तथा सामुदायिक संसाधन व्यथक्तियों के कौशल को उन्नवत करने पर बल दिया जा रहा है।
मनरेगा के अंतर्गत अधूरे कार्य पूरा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। इसलिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 61.39 लाख अधूरे कार्यों को पूरा करने की योजना बनाई है।
कड़ी निगरानी और राज्योंर के साथ सक्रिय सहयोग से मंत्रालय वित्तस वर्ष 2016-17 तथा चालू वित्तस वर्ष में 1.02 करोड़ कार्य की पूर्णता सुनिश्चित करने में सफल रहा है। कारगर निगरानी के जरिए कार्य पूरा होने में हमें सुधार की आशा है।
कार्य के अलग.अलग स्व्भाव और आकार तथा शामिल हितधारकों की अलग.अलग क्षमताओं को देखते हुए लक्षित समूह की आवश्य कताओं के अनुकूल अलग ट्रेनिंग मोड्यूल डोमेन विशेष शीर्ष संगठनों के समर्थन से विकसित किए गए हैं। ये प्रशिक्षण मोड्यूल सक्षम बैनर के अंतर्गत तकनीकी कर्मियों को प्रशिक्षित करने के आधार पर बनाए गए हैं। यह कार्यक्रम 19 जून 2017 को माननीय ग्रामीण विकास मंत्री ने लांच किया था और 65.000 तकनीकी कर्मियों को कवर करते हुए 15 मार्च 2018 को पूरा किया जाएगा।ब्लॉूक स्त्र पर 48.934 कर्मियों को जलसंभर, भूजल विज्ञान, पौधरोपण तथा एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसे विषयों के साथ परियोजना नियोजन तथा निगरानी के लिए दूरसंवेदी और जीआईएस उपायों के इस्तेूमाल के बारे में क्षमता सम्पेन्नल बनाया गया है। इस व्योपक कार्य में राष्ट्री य दूरसंवेदी केन्द्रक हैदराबाद तथा केन्द्री य भूजल बोर्ड ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ सहयोग किया।
मनरेगा श्रमिकों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना महत्वकपूर्ण क्षेत्र है। कार्य नियोजन तथा कार्य की समय से निगरानी और ग्राम पंचायत स्तरर पर तकनीकी संसाधनों की उपलब्धकता की खाई को पाटकर परिंसंपत्ति की गुणवत्तार और टिकाऊ अवधि सुधार के लिए 6,367 अकुशल कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। यह स्थािनीय युवा ;10वीं पासद्ध हैं और मनरेगा श्रमिक परिवार से आते हैं। सुपरवाइजरों की भी पहचान की गई है और उन्हें 90 दिन का आवासीय प्रशि‍क्षण प्रदान किया गया है, उनका मूल्यां कन किया गया है और 150 रुपये दैनिक वजीफे सहित 62,040 रुपये प्रति व्यतक्ति की लागत से प्रशिक्षित करने के बाद उन्हेंश प्रमाणित किया गया ।
मंत्रालय ने लागत में एकरूपता लाने, चोरी रोकने और कार्य की गुणवत्ता सुधारने के लिए रोजगार के लिए ग्रामीण दरों का उपयोग करते हुए अनुमान गणना के लिए सॉफ्टवेयर ;सिक्यो रद्ध अपनाकर तकनीकी विशेषता कार्य और कार्य प्रवाह की बारीकियों के माध्‍यम से अनुमानों को मानक रूप देने के लिए कदम उठाए हैं। मंत्रालय ने सिक्योार पर राज्य जिला तथा ब्लॉ‍क स्तयर पर संसाधन व्येक्तियों पर प्रशिक्षण प्रारंभ कर दिया है।
प्रशासकीय और वित्तीरय रूप से स्वऔतंत्र सामाजिक लेखा इकाइयों की स्था्पना और समर्पित संसाधन व्यसक्तियों के प्रशिक्षण के जरिए अधिसूचित लेखा मानकों के अनुरूप सामाजिक लेखा के लिए संस्थागत व्य वस्थो को मजबूत बनाना सुनिश्चित किया गया। राज्यि, जिला तथा ब्लॉ।क स्त्र पर इन स्व तंत्र सामाजिक लेखा इकाइयों के 3760 व्य क्तियों को प्रशिक्षित किया गया है, उनका मूल्यां कन किया गया है और सामाजिक लेखा पर 30 दिन का सर्टिफिकेट कोर्स पूरा करने पर टाटा समाज विज्ञान संस्थाान द्वारा प्रमाणित किया गया है।
सामाजिक लेखा कार्य के लिए ग्रामीण संसाधन व्य क्ति के रूप में महिलाओं के स्वरयं सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। अब तक ग्राम पंचायत स्त।र पर सामाजिक लेखा कार्य करने के लिए चार दिनों के प्रशिक्षण मोड्यूल के अंतर्गत 4700 महिला स्वोयं सहायता समूहों के सदस्योंे को प्रशिक्षित किया गया है। पारदर्शिता लाने और कार्यक्रम की व्याापकता बनाने के लिए मंत्रालय मनरेगा संपत्ति संबंधी आंकड़ों को देखने, उनका विश्लेंषण करने तथा उनकी संभावनाओं के लिए जीआईएस आधारित जियो मनरेगा समाधान लागू कर रहा है। पूरे देश में अभी तक 2.34 करोड़ सम्प त्तियों को जियोटैग किया गया है। मंत्रालय अब 01 नवम्बवर, 2017 से 31 राज्योंतध्केन्द्र शासित प्रदेशों में जियोमनरेगा चरण.3 प्रारंभ किया है। जियोमनरेगा चरण.2 के अंतर्गत तीन चरणों पर जियोटैगिग का कार्य किया जा रहा है। 21,22 अगस्ता 2017 को राज्य‍ संसाधन व्ययक्तियों के लिए राष्ट्री य ओरिएंटेशन कार्यशाला तथा प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इसके बाद अब तक राज्यस, जिला, ब्लॉसक तथा ग्राम पंचायत के 2,69,075 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है।
मनरेगा के अंतर्गत राष्ट्री य संसाधन प्रबंधन कार्यों के प्रभाव का जायजा लेने के लिए नई दिल्लीज के आर्थिक विकास संस्थाीन द्वारा किए गए अध्य‍यन में प्रभाव दिखने लगे हैं। 21 राज्योंद के 30 जिलों से प्राप्त प्राथमिक और द्वितीयक डाटा बताते है कि मनरेगा के अंतर्गत फसल में तेजी और‍ विविधता से ग्रामीण परिवार की आय बढ़ी है। 76 प्रतिशत परिवारों का कहना है कि मनरेगा के अंतर्गत बनाई गई सम्प त्तियां बहुत अच्छीगध्अच्छीब हैं। केवल 0.5 प्रतिशत लाभार्थियों ने माना कि सम्पछत्तियों की गुणवत्तास संतोषजनक नहीं है।
(मलिक असगर हाशमी)

Related posts

Leave a Comment