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दिल्ली में किसानों पर लाठीजार्च यानी केंद्र की किसान हितैशी होने की खुली पोल, कैसे यहां पढ़ें Other, कृषि, कृषि नीति, ख़बरें, विशेषज्ञ

शायद इसे ही ‘आ बैल मुझे मार’ और ‘उंट पर कुत्ता काटना’ कहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अनेक निर्णयों एवं घोषणाओं से पिछले पांच-छह महीने से यह साबित करने को आमादा हैं कि उनकी सरकार किसान हितैशी है। वे 2022-24 तक देश के किसानों की आमदनी दोगुना होते देखना चाहते हैं। मगर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के दिन दिल्ली पुलिस द्वारा उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर किसानांे पर जिस तरह लाठियां,आंसू गैस के गोले और पानी की बौछाकर की गई उससे मोदी जी की मंशा पर शक होने लगा है। इस घटना को लेकर किसान बेहद नाराज हैं। एक अहम बैठक कर कोई बड़ा निर्णय लेने वाले हैं। यानी उनकी आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की खटिया खड़ी करने का इरादा है।
चूंकि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृहमंत्रालय के अधीन है, इसलिए किसानों पर हुए ‘पुलिसिया अत्याचार’ के लिए केंद्र सरकार सीधे-सीधे जिम्मेदार है। इस लिए भी केंद्र के किसान हितैशी होने पर उंगली उठने लगी है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री का किसान प्रेम केवल घोषणाओं तक तो सीमित नहीं ? क्या सरकार के पास किसानों की मांगें सुनना का भी समय नहीं ? यदि सरकार किसान हितैशी होती तो दिल्ली की सीमा पर लाठी भंजवाने की जगह किसान यात्रा की शुरूआत मंें ही अपने नुमाइंदे भेजकर उनकी शिकायतें सुनकर उसे रफ-दफा करने का प्रयास करती। यूपी और उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है। यानी इस काम को दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्री बखूबी कर सकते थे। अब कहा जा रहा है कि चूंकि सरकार की किसानों को लेकर मंशा कुछ और है इसलिए मसले को सुलझाने का नाटक करना भी उसने जरूरी नहीं समझा।
उल्लेखनीय है कि देश की सत्तर प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में बस्ती है। यहां के लोग किसी भी चुनाव के हार-जीत का फैसला करने का माददा रखते हैं। खेतबाजार डॉट कॉम भविष्यवाणी कर चुका है कि अगला आम चुनाव खेत-खलिहानों में लड़ा जाएगा। गुजरात में हमें इसकी बानगी देखने को मिल चुकी है। मंगलवार की घटना पर राहुल सहित तमाम विपक्षी दलों ने अफसोस और गुस्से का इजहार किया है। मगर इससे काम नहीं चलने वाला। विपक्ष दलों को किसानों के प्रति एकजुटता दिखानी होगी। इसके लिए यह सही वक्त है। यदि विपक्षी दल भी सोचते हैं कि आलोचना मात्र से किसानों का दिल जीता जा सकता है तोे यह उनकी भूल है। विपक्षी दलों को चाहिएकि केंद्र की अस्लियत उजागर करे। आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर देश वासियों को बताया जाए कि केंद्र सरकार के किसान हितैशी होने की सच्चाई क्या है ? इसके साथ अजीत सिंह को हलके में लेने वालों को भी अब संभल जाना चाहिए। वह और उनके बेटे पश्चिमी उत्तर प्रदेश मंें किसी भी सरकार की कब्र खोदने की सलाहियत रखते हैं।
बता दूं कि मंगलवार को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की सीमा से दिल्ली आ रहे किसानों को तितर बितर करने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े जिसमें कई किसान घायल हो गए।
पुलिस ने मंगलवार को गाजियाबाद से दिल्ली आने वाले ज्यादातर रास्तों को सील कर दिया और जहां आने जाने की छूट दी गई उन रास्तों पर कड़ी चौकसी बरती गई। राष्ट्रीय राजमार्ग २४ से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद रखी गई। इस कारण आनंद विहार से दिल्ली के विभिन्न स्थानों को आने जाने वाली दिल्ली नगर निगम-डीटीसी की बसों को भी इस मार्ग पर नहीं जाने दिया गया। सीमापुरी बार्डर में भी पुलिस का कड़ा पहरा रहा जिसके कारण वहां भी जाम लगा रहा।
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने किसानों पर की गई पुलिस कार्रवाई कड़ी निंदा करतेे हुए कहा है कि किसान अपने साथ अन्याय नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए आ रहे थे लेकिन उन्हें जबरन रोका गया और मारा पीटा गया। किसान चुप बैठने वाले नहीं। इस बारे में मिलकर बातचीत करेंगे और आगे की रणनीति बनाएंगे। उन्होंने कहा कि किसान क्रांति यात्रा के तहत शांतिपूर्वक प्रदर्शन करते हुए दिल्ली में राजघाट पर आ रहे थे। वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।
राजनीतिक दलों ने किसानों पर हुए लाठी चार्ज की निंदा की है। कांग्रेस की सर्वाेच्च नीति निर्धारक संस्था कार्य समिति ने इस संबंध मंे महाराष्ट्र के वर्धा में आयेाजित अपनी बैठक में प्रस्ताव पारित कर पुलिस कार्रवाई की निंदा की है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस घटना की निंदा की और भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करते हुए कहा शांतिपूर्वक दिल्ली आ रहे किसानों की बर्बर पिटाई की गई। अब किसान देश की राजधानी आकर अपना दर्द भी नहीं सुना सकते।

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