ईरान के ‘मोहसिन’ ने बर्बाद कर दिया हरियाणा और पंजाब के चावल निर्यातकों को….कैसे, यहां जाने

मलिका असगर हाशमी
ईरान की चावल की सबसे बड़ी आयातक कंपनी मोहसिन की चालबाजियांे से हरियाणा और पंजाब के बासमती चावल के कारोबारी सड़क पर आ गए हैं। कई चावल मिलें बंद हो गई हैं और कुछ पर ताला लगने की नौबत आ गई है। पिछले छह-सात सालों में मोहसिन अपना साम्राज्य खड़ा करने मंें सफल रही, दूसरी तरफ भारत के चावल निर्यातकों की बर्बादी का दौर भी शुरू हो गया। स्थिति है कि कंपनी पर हरियाणा और पंजबा के चावल कारोबारियों का तकरीबन दो हजार करोड़ रूपये बकाया है। इसके बावजूद यह कंपनी मई में बिक गई। इसे भारत के अडानी ग्रुप और ईरान की एक अन्य चावलल कंपनी शिरिनासल ने साझा तौर पर 550 लाख रूपये में खरीदा है।
इस खरीद-फरोख्त में भारत के चावल कारोबारियों की बकाया रकम डूब गई है। देनदारी के प्रति अब तक अडानी गु्रप की ओर से रूख स्पष्ट नहीं करने से चावल कारोबारियों पर मायूसी छाई है।
गौरतलब है कि ईरान और सउदी अरब प्रत्येक वर्ष भारत से करीब 40 लाख टन बासमती खरीदता है। इसमें 16-16 लाख टन हरियाणा व पंजाब तथा शेष 8 लख टन देश के अन्य हिस्से से निर्यात किया जाता है। चंूंकि मोहसिन ईरान की सबसे बड़ी आयातक कंपनी है, इसलिए इसका खरीदारी में 30 से 35 प्रतिशत तक शेयर होता है। आल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सेतिया कहते हैं कि मोहसिन के काम करने का ढंग शुरू से आपत्तिजनक रहा है। वह भारत के कारोबारियों से उधार मंे चावल खरीदकर सस्ते दाम पर ईरान में बेचता था। चावल बेचने के बाद ही वह अपनी उधारी चुका था।
हरियाणा के पानीपत और कैथल के चावल कारोबारी कहते हैं कि दस साल पहले मोहसिन ने भारत के एक चावल निर्यातक से संपर्क साधकर चार कंटेनर चावल खरीदा था। उसी साल उसने एक अन्य फर्म से संपर्क कर पिछले निर्यातक का हवाला देकर उससे माल उठा लिया। फिर तीसरे फर्म से मिलकर पिछले दो अन्य फर्मों का हवा देकर उससे चावल खरीद लिया। इसी तरह उसने पंजाब एवं हरियाणा के अधिकांश चावल निर्यातकों को अपने शीशे मंे उतार लिया। सेतिया बताते हैं कि पैसा अधिक दिनों तक फंस जाने के कारण कुछ साल पहले भारत के चावल के निर्यातकों का एक दल ईरान गया था, जिन्हें समझा-बुझाकर चलता कर दिया गया। बताते हैं कि मोहसिन का टर्नओवर 2500 करोड़ रूपये तक पहुंच गया था। इसके बाजूद यह कंपनी बेच दी गई।
चावल निर्यातक रोहित गर्ग के मुताबिक, बकाया रकम नहीं मिलने से हरियाणा की बेस्ट फूड कंपनी बंद हो चुकी है। इसी तरह हरियाणा की नंबर एक कंपनी विष्णु इटेबल्स पर ताला लटक चुका है। इसके खिलाफ तकरीबन 250 आढ़तियों ने 30 करोड़ रूपये की देनदारी का मुकदमा दर्ज कराया है। ऐसी नौबत कुछ और निर्यातक कंपनी के साथ आने वाली है। आल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सेतिया कहते हैं कि उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय से संपर्क कर ईरान सरकार पर दबाव बनाकर वकायादारों की रकम चुकाने का रास्ता निकलवाने की अपील की है। ऐसा नहीं होने पर देश के अधिकांश चावल निर्यातक पूरी तरह कंगाल हो जाएंगे। आढ़ती उनपर मुकदमा ठोंकेंगे सो अलग।

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