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खट्टर ने पीएम मोदी को ‘किसान नेता’ साबित करने के लिए सारी हदें पार कीं… किसान नाखुश Other, कंपनी समाचार, कृषि, कृषि बाजार विशेष, ख़बरें, खेत तकनीक, मौसम

केंद्र द्वारा खरीफ फसलों के समर्थन मूल्या में व्यापक बढ़ौतरी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘किसान नेता’ के तौर पर प्रोजेक्ट करने के लिए भारतीय जनता पार्टी की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर हरियाणा में कुछ ज्यादा अमल हो रहा है। प्रदेश की खट्टर सरकार की ओर से पीएम मोदी को देश का सबसे बड़ा ‘किसान हितैशी’ जाहिर करने को ग्रामीण इलाकों में बड़े-बड़े होंडिंग लगाए गए हैं। इसके अलावा दूर-दराज तक जाने वाली हरियाणा रोडवेज की बसों पर ऐसे ही बड़े आकार के पोस्टर चस्पां करावाए गए हैं। इसके साथ मनोहरलाल खट्टर सरकार सूरजमुखी, बाजरा, बपास आदि के नाम पर प्रदेश के उन ग्रामीण क्षेत्रों में रैलियों का सिलसिला चलाए हुए है जहां वोटों का फैसला किसान और खेतिहर मजदूर करते हैं। इस क्रम में 12 अगस्त को ‘जाटलैंड’ के गोहाना में प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा करने को ‘धन्यवाद रैली’ के आयाजन की तैयारी है।
दूसरी तरफ, किसान सवाल उठा रहे हैं कि प्रदेश में जब खेती-किसानी का माकूल माहौल होगा, तभी वे खरीफ फसलों के बढ़े समर्थन मूल्य का लाभ लेने की स्थिति में होंगे। हरियाणा के अधिकांश क्षेत्रों में 31 जुलाई तक 14 प्रतिशत कम बारिश हुई है। नहरों मंें पानी नहीं है। सिंचाई की समस्या मुंह बाए खड़ी है। कम बारिश के चलते सूबे के भिवानी और इससे लगते इलाके में कपाल की खेती में सफेद मक्खी और मोरपंख का रोग लग गया है। कपास की फसल बर्बादी के कगार पर है। किसान देवेेंद्र कहते हैं कि उन्होंने 25 एकड़ में कपास की फसल लगाई है। स्प्रे सहित सारे उपाए कर लिए, पर रोग है कि जाता नहीं। हिसार, चरखीदादरी, सोनीपत में नहरी पानी को लेकर किसान आंदोलनरत हैं। हांसी के कुलाना, लालपुर, हांसी ढाणी के लोग नहरों में पानी नहीं छोड़ने को लेकर निरंतर प्रदर्शन कर रहे हैं। सोनीपत के जटवाड़ इलाके के लोगों का आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों में समुचित बिजली भी नहीं मिल रही। बिजली के अभाव में वे इससे चलने वाले सिंचाई के उपक्रणों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे। मेवात क्षेत्र में आधी रात को बिजली दी जा रही। इस क्षेत्र में गोकशी विवाद के चलते रातों को किसान खेतों में जाने से कतराते हैं। सवाल उठता है कि जब खरीफ फसल ही नहीं होंगे तो किसानों को बढ़े हुए समर्थन मूल्य का लाभ कैसे मिलेगा ? और जब लाभ नहीं मिलेगा तो प्रधानमंत्री को किसान नेता साबित करने का क्या तुक ? सरकार को चाहिए कि पहले खेती-किसानी का भरपूर लाभ लेने को लेकर प्रदेश में माहौल तैयार करे, तभी जाकर भाजपा अपने मकसद में कामयाब होगी, क्योंकि इस बार आम चुनाव का फैसला किसान और खेतों की दशा से तय होने वाला है।

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