राहुल का मजाक उड़ाने के चक्कर में धुंधलाया मोदी का किसान हितैशी चेहरा….कैसे….यहां पढ़ें

‘‘ अविश्वास प्रस्ताव की वजह पूछी तो गले ही पड़ गए।’’उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में योगी सरकार की ओर से आयोजित ‘किसान कल्याण रैली’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का यह अंश दरअसल, उस संदर्भ में है जब लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान केंद्र को खरी-खरी सुनाने के बाद एक बहाने से’ अपनी सीट से उठकर मोदी से गले मिलने पहुंच गए थे। राहुल की इस हरकत पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने ऐतराज जताया है और भारतीय जनता पार्टी इसका लगातार मजाक उड़ा रही है। असल में, राहुल गांधी यही चाहते थे। प्रधानमंत्री ने जब से खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाने का एलान किया है, देश में ‘किसान राजनीति’ चरम पर है। खासकर, भारतीय जनता पार्टी इसी बहाने मोदी को देश का सबसे बड़ा किसान नेता बताने पर आमादा है। इसके लिए भाजपा शासित प्रदेशों में रैलियां की जा रही हैं और केंद्र सरकार द्वारा अब तक किसानों के हित में किए गए काम गिनाए जा रहे हैं। इस दौरान यह जताने की कोशिश की जाती है कि कांग्रेस की सरकारों में किसानों के कल्याणार्थ जो हुआ, उससे कहीं ज्यादा पिछले साढ़े चार सालों में हुआ है।
यूपी के शाहजहांपुर में आयोजित किया गया किसान कल्याण रैली उसी संदर्भ में था। उसी दिन हरियाणा के रेवाड़ी में ‘बाजरा रैली’ आयोजित की गई थी। किसान राजनीति को हवा देने के लिए भाजपा की ओर से ऐसी ही रैलियां राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे उन राज्यों में आयोजित करने का नीतिगत फैसला लिया गया है जहां विधानसभा चुनाव जल्द होने हैं। कयास है कि लोकसभा चुनाव के साथ ही हरियाणा में विधानसभा चुनाव कराया जा सकता है, इसलिए इस भाजपा शासित प्रदेश में भी किसान राजनीति को खूब हवा दी जा रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री अपनी रैलियों में नरेंद्र मोदी को चौधरी चरण सिंह, देवीलाल और एचडी देवगौड़ा से बड़ा किसान नेता बता रहे हैं। मगर लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गले मिलने का असर है कि भाजपा की किसान रैलियों में किसानों पर बातें कम राहुल गांधी पर ज्यादा की जा रही हैं। राहुल का मजाक जड़ाने के चक्कर में समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने का नफा-नुक्सान किसानों को उतनी शिद्दत से नहीं बताया जा रहा, जिस ढंग से इसके लिए तैयारी की गई थी। अखबारों एवं मीडिया की सुर्खियों में भी भाजपा-नरेंद्र मोदी का किसान हितैशी चेहरा धुंधला पड़ गया है। अविश्वास प्रस्ताव के भाषण की खबरें में मोदी से कहीं अधिक तवज्जो राहुल की ‘झप्पी’ को दी गई। तमाम अखबारों के फ्रंट पेज पर ‘राहुल-मोदी’ के गले लगने वाली तस्वीरें छपीं।
By M.A.Hashmi

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