प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनेंगे ‘किसान रत्न’ …कैसे, यहां जानें

मलिक असगर हाशमी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगामी चुनावों में ‘किसान रत्न’ के तौर पर पेश करने की तैयारी है। इसके लिए भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाइयों की बैठकों में प्रस्ताव पास कराने का क्रम शुरू हो गया है। भारत में मोदी जैसा कोई और नहीं, यह जताने के लिए केंद्र की ओर से खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 200 रूपये प्रति कुंतल इजाफा करने के ऐलान के साथ भाजपा शासित प्रदेशों की ओर से राष्ट्रीय समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर ‘मोदी वंदन’ की होड़ मची है। साथ में प्रदेश कार्यकारिणी की ओर से ‘किसान रत्न’ के प्रस्ताव पास करने का सिलसिला भी चल पड़ा है। ऐसा ही एक प्रस्ताव हरियाणा भाजपा ने 8 जुलाई को फरीदाबाद के सूरजकुंड में एक बैठक में पास किया।
हालांकि, केंद्र के खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी बढ़ाने के इस कदम को अर्थशास्त्री सही नहीं मानते। इसके अलावा देश में बिजली और सिंचाई की मौजूदा स्थिति से भी किसानों को इसका बहुत लाभ नहीं मिलने वाला। फसल ही नहीं होगी तो समर्थन मूल्य कहां से मिलेगा ? अर्थशात्रियों को लगता है चुनावी मौसम में केंद्र का फैसला आम देशवासियों पर भारी पडे़गा। फसलों के एमएसपी बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी और जीडीपी भी प्रभावित होगा। घोषणा लागू होने पर सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी पर यह प्रभाव 2018-19 में 0.1 से 0.2 प्रतिशत तक पड़ सकता है। वैश्वि वित्तीय सेवा संस्थान डीबीएस की मानें तो केंद्र सरकार की ताजा घोषणा के अुनसार, धान का एमएसपी रिकार्ड 200 रूपये प्रति क्विंटल और अन्य खरीफ फसलों की एमएसपी 52 फीसदी तक बढ़ने से पूंजीगत खर्च घटाने की जरूरत पड़ेगी। एसोचैम महासचिव डीएस राव भी सरकार के इस कदम को किसानों की समस्या का आदर्शन और सटीक समधान नहीं होना करा दे चुके हैं।
कुल मिलाकर केंद्र की मोदी सरकार का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने वाला फंडा आने वाले समय में असरदार होगा, संदेह है। मगर ऐसी नौबत आने से पहले ही प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी को ‘किसान रत्न’ के तौर पर पेश करने की भाजपा और आरएसएस की ओर से पटकथा लिखा जा चुका है। जल्द ही इसका प्रचार प्रसार भी शुरू हो सकता है। पिछले आम चुनाव से पहले भाजपा ने किसानों से स्वामीनाथम आयोग की सिफारिशें लागू करने का वादा किया था। उसपर तो अमल नहीं हुआ। इसकी जगह नया खेल प्रारतंभ हो गया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं हरियाणा के प्रभारी अनिल जैन कहते हैं कि मोदी स्वामीनाथन से भी दो कदम आगे निकल गए। उनका कहना है कि किसानांें के हितों के लिए भाजपा ने लागू किया है ‘स्वामीनाथन आयोग’ की जगह ‘मोदी आयोग’। न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने से किसानों को बाजरे की कीमत लगभग दोगुनी मिलने लगेगी। पिछले चार सालों मंें सरकार ने किसानों को ब्याज मुक्त कर्ज देने और फसल बीमा योजना जैसी कई स्कीमें लागू कीं, जिससे किसानों एवं खेतों की तस्वीर बदल रही है। देश के तकरीबन 80 करोड़ लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से खेती-किसानी से जुड़े हैं। इन आंकड़ों की ताकत को भाजपा भली-भांति समझ चुकी है, इसलिए शहरी पार्टी कहे जाने वाला यह सियासी दल किसानों को रिझाने को पूरी शिद्दत से लगा है। आम चुनाव आने तक किसानों को लेकर कुछ और बड़ी घोषणाओं की उम्मीद केंद्र सरकार से की जा सकती है।

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