स्टेट बैंक ऑफ इंडिया प्रधानमंत्री के प्रयासों की राह का रोड़ा तो नहीं बन रहा…कैसे ?

मलिक असगर हाशमी
इसे कहते हैं सरकारी योजना में पलीता लगाना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम निरंतर इस जुगत में है कि अगले छह-सात वर्षों में किसानों की आमदनी दोगुनी कर दी जाए और कृषि कार्य में आने वाली अधिकांश दिक्कतें दूर कर दी जाएं। मगर सरकार में बैठे कुछ लोग ही मोदी ही की योजना को सिरे चढ़ाने की बजाए राह में रोड़ा अटका रहे हैं। इसका बेहतर और ताजा उदहारण है 18 जुलाई को अखबारों में प्रकाशित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई का एक विज्ञापन। देश की अग्रणीय बैंक एसबीआई की ओर से उसके सभी ग्रामीण इलाकों के केंद्रों पर 18 जुलाई को ‘किसान मिलन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य था फसल, डेयरी, ट्रैक्टर और दूसरे कृषि कार्यों के लिए किसानों को लोन लेने में आ रही बाधाओं को दूर करना। मगर बैंक की ओर से इस बारे में अखबारों में किसानों को सूचित करने वाले विज्ञान अंग्रेजी में प्रकाशित किए गए। सभी जानते हैं कि देश के अधिकांश किसानों के हाथ अंग्रेजी में तंग है। उनमें से 90 फीसदी को अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं। ऐसे में प्रश्न उठना वाजिब है कि आखिर एसबीआई ने इतनी महत्पूर्ण सूचना अंग्रेजी में क्यों और किसके लिए अखबारों में प्रकाशित करवाई। क्या यह सरकारी पैसे का दुरूपयोग और किसानों को लोन योजना से दूर रखना नहीं है ? मजे की बात है कि इस विज्ञान में अंग्रेजी में मोटे-मोटे अक्षरों में छापा गया है-ऑवर मिशन, योर प्रोग्रेस! क्या ऐसे ही देश के किसान तक्करी करेंगे ?

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