केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह चुनाव क्षेत्र बदलने की तैयारी में…..क्योंकि

देश के कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह अपना चुनाव क्षेत्र बदल सकते हैं। हिंदुस्तानभर के किसानों की आमदनी दोगुना करने का दावा करने वाले कृषि मंत्री के अपने ही चुनाव क्षेत्र के कृषकों की दशा खराब है। जिन उम्मीदों के साथ बिहार के चंपारण क्षेत्र की जनता ने उन्हें पिछले लोकसभा चुनाव में जीत दिलाकर दिल्ली भेजा था, पिछले चार वर्षों में राधा मोहन सिंह उसपर खरे नहीं उतरे। केंद्र में कृषि कल्याण मंत्री रहते उन्होंने अब तक अपने इलाके की बंद चीनी मिलों को भी नहीं खुलवाया है। इलाके के उद्योग धंधे चौपट हैं। चंपारण में खेती-किसानी चौपट है।
महात्मा गांधी की कर्मभूमि और बाल्मीकि की तपोभूमि रहे चंपारण क्षेत्र से भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में तीनों सीटें जीती थीं। क्षेत्र के किसानों की नाराजगी को देखकर कर लगता है कि अगले चुनाव में पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है । इसलिए राजनीतिक हलके में चर्चा होने लगी है कि तीनों सांसद अपना चुनाव क्षेत्र बदल सकते हैं । मोतिहारी से सांसद एवं केन्द्रीय कृषिमंत्री राधामोहन सिंह बाल्मीकि लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं । इसी तरह बेतिया से संजय जयसवाल को टिकट नहीं देकर बाल्मीकि नगर के सांसद सतीश चन्द्र दुबे को दिया जा सकता है। मोतिहारी सीट गठबंधन सहयोगी जदयू की झोली में जा सकती है । इस बारे में पश्चिम चंपारण के भाजपा जिलाध्यक्ष गंगा प्रसाद पाण्डेय का कहना है कि पार्टी चंपारण की तीनों सीट पर चुनाव लड़ेगी। तीनों सीटों पर कौन प्रत्याशी होगा, अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
दूसरी तरफ जीते हुए प्रत्याशियों के सन्दर्भ में आम चर्चा है कि भाजपा के तीन.तीन सांसद रहते चंपारण को केन्द्र से अब तक कोई विशेष तोहफा नहीं मिला है । बेतिया कुमारबाग का स्टील प्लांट, चनपटिया.मोतिहारी का चीनी मिल अब तक बंद पड़ा है, जिससेे दोनों स्थानों पर किसानों की मुख्य फसल गन्ना की खेती 2014 की तरह ही प्रभावित है। बंद फैक्टरियों के मजदूर बिहार से बाहर जाकर रोजी.रोटी का जुगाड़ करने को मजबूर हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री पद के दावेदार रहे नरेन्द्र मोदी ने रामनगर और मोतिहारी की जनसभाओं में कहा था कि भाजपा की सरकार केन्द्र में आने पर मजदूरों, किसानों को बड़ी राहत दी जाएगी और बंद पड़ी फैक्टरियों के लिए अच्छे दिन लाए जाएंगे। मगर ऐसा अब तक नहीं हुआ है। इसके उलट रामनगर, बगहा की चीनी मिलों की दशा दिनों दिन खराब हो रही है । दोनों चीनी मिलें किसानों के गन्ना घटतौली का प्रयाय बन गई हैं । प्रशासन ने इन दोनों चीनी मिलों के प्रबंधकों पर प्रथमिकी दर्ज कराई हुई है । बगहा चीनी मिल पर किसानों का इस वर्ष फरवरी, मार्च, अप्रैल माह का अरबों रुपये से ज्यादा का बकाया है, जबकि गन्ना पेराई के मामलें में दोनों चीनी मिलों ने रिकार्ड पेराई की है। मजे कि बात है कि गांधीजी के सत्याग्रह आंदोलन के डेढ़ सौ वर्ष होने पर बिहार सरकार द्वारा एक वर्ष से मनाए जा रहे सत्याग्रह डेढ़ सौ वर्षीय वर्षगांठ के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी चंपारण आए । यहां देशभर से जुटे स्वच्छता स्वाग्रहियों के बीच उन्होंने स्वच्छता अभियान के लिए आंदोलन छेड़ने का आहवान किया, पर किसान.मजदूरों की बदहाली दूर करने के संदर्भ में कुछ कहना मुनासिब नहीं समझा। इस बारे में राजद के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव आलमगीर रब्बानी कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी का किसानों की समस्या से कोई लेना देना नहीं है। अगले आम चुनाव में मोदी जी देखेंगे कि किसानों और मजदूरी की अनेखी भाजपा पर कितना भारी पड़ने वाली है।

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