समर्थन मूल्य बढ़ाने और कर्ज माफी से क्या होगा…..

मलिक असग़र हाश्मी
पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाने का ऐलान और उसके अगले दिन कर्नाटक की कांग्रेस-जनता दल सेक्यूलर की सरकार का किसानों की 34000 करोड़ रुपये के ऋण माफी की घोषणा, साफ संकेत हैं कि आने वाले चुनावों में किसान, कृषि और इसके प्रति सरकारों तथा पार्टियों का रवैया निर्णायक साबित होने वाला है। देश के प्रमुख दलों में खुद को किसान हितैशी साबित करने की होड़ सी लगी है। इस लिए रोज नए-नए दावे और नई योजनाओं के ऐलान सुनने को मिल रहे हैं। मगर अहम सवाल यह है कि क्या ऐसी लोकलुभानी घोषणाओं से गर्दन तक परेशानियों में डूबे किसानों की मुसीबत कम होने वाली है ?
वास्तविकता यह है कि इन दावों और प्रति दावों के बीच देश के तकरीबन पांच करोड़ कर्जदार किसानों का मसला कहीं खो सा गया है। उन्हें इस झांझावत से कैसे निकाला जाए, इसके लिए ठोस पहल की आवश्यकता है। यह ना होकर रोज नई-नई घोषणाएं कर अवाम के बीच खुद को किसानों का मसीहा साबित करने से कुछ नहीं होने वाला। 31 मार्च 2017 के नेशनल सैंपल सर्वे आग्रेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश का प्रत्येक किसान औसतन सवा तीन लाख रुपये के कर्ज में डूबा है। करीब 59 प्रतिशत संस्थागत और 41 फीसदी किसान सेठ-साहुकारों के कर्ज के बोझ तले दबे हैं। कर्ज अदा नहीं करने के कारण उन्हें आत्महत्या जैसे परिवार और समाज को हिलाने वाले कदम उठाने पड़ रहे हैं। दो दिन पहले ही मध्य प्रदेश के दो किसानों ने कर्ज अदा न कर पाने से परेशान होकर खुदकुशी कर ली।
फिल्हाल किसानों को कर्ज के भंवर से निकाले की आवश्यकता है। इसके लिए कृषि कार्यों को फायदामंद बनाने के साथ किसानों के उत्पाद का समुचित मूल्य दिलाने का इंतजाम करना होगा। बिचौलियों को हतोत्साहित करने को कारगर कदम उठाने होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पता है कि वाहवाही लूटने के लिए समर्थन मूल्य में बढ़ौतरी का ऐलान केवल उन किसानों को लाभ पहुंचाने वाला है जहां खरीद प्रणाली काम करती है। देश के ऐसे कैसे कई प्रांत हैं जहां मंडी का कोई कन्सेप्ट नहीं। किसान आढतियों या थोक-व्यापारियों को अपनी फसल औने पौने दामों में बेच देते हैं। इस समस्या से समस्त किसानों को उबारने के लिए खरीद की गारेंटी की आवश्यकता है। यानी किसानों का उत्पाद रखरीदने वाला सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य से किसी भी कीमत पर खरीदारी नहीं कर सकता। ऐसा करते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान हो। इसके अलावा श्रृण की शर्ताें एवं व्यवस्था का थोड़ा सरलीकरण होना चाहिए। कृषि मूल्य एवं लागत आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार रबी-खरीफ के लिए सात प्रतिशत के ब्याज पर किसानों को तीन लाख रूपये तक का कर्ज देती है। जो किसान समय पर कर्ज अदा करते हैं उनकी ब्याज दर चार प्रतिशत कर दी जाती है। ऐसी योजनाओं को प्रोत्साहित करना होगा। किसानांे को कर्ज के लिए सेठ-साहुकारों के पास न जाना पड़े, इसके लिए भी ठोस कदम उठाने होंगे। ऐसा करने से आत्महत्या की वृद्धि दर भी कम होगी और किसान धीरे-धीरे कर्ज के जकड़न से निकलने भी लगेंगे।

भारत में कुल कृषक परिवार और खेतिहर मजदूर परिवार
राज्य कुल कृषक परिवार
; एनएसएसओ रिपोर्ट 569द्ध कुल खेतिहर मजदूर ;एनएसएसओरिपोर्ट 577द्ध कृषि पर
आधारित
कुल परिवार
आंध्रप्रदेश 3596800 1811900 5408700
बिहार 7094300 3300000 10394300
छत्तीसगढ़ 2560800 586100 3146900
गुजरात 3930500 1111400 5041900
झारखंड 2233600 58500 2292100
कर्नाटक 4242100 1889900 6132000
केरल 1404300 611700 2016000
मध्यप्रदेश 5995000 1618000 7613000
महाराष्ट्र 7097000 2929100 10026100
ओड़ीसा 4493500 1107100 5600600
पंजाब 1408300 345200 1753500
राजस्थान 6483500 362900 6846400
तमिलनाडु 3244300 2135500 5379800
तेलंगाना 2538900 1137300 3676200
उतरप्रदेश 18048600 2129400 20178000
पण् बंगाल 6362400 3230800 9593200
हरियाणा 1569300 136500 1705800
जम्मू और कष्मीर 128300 14700 143000
हिमाचल प्रदेश 881100 10700 891800
भारत 90201100 25039600 115240700
खेतिहर मजदूरों पर कर्ज
राज्य प्रति 1000 परिवारों पर खेतिहर मजदूर परिवार संख्या प्रति 1000 खेतिहर मजदूर में से कर्जदार मजदूर औसतन नकद कर्ज रुपये में अनुमानित खेतिहर मजदूर संख्या कुल कर्ज राशि . करोड़ रू़ जनगणना 2011 के मुताबिक खेतिहर मजदूर दस लाख में
1 2 3 4 5 6 7
आंध्रप्रदेश 209 494 31577 1811900 5721 16ण्97
बिहार 235 339 15396 3300000 5081 18ण्35
छत्तीसगढ़ 156 139 2206 586100 129 5ण्09
गुजरात 189 171 16800 1111400 1867 6ण्84
हरियाणा 53 394 25465 136500 348 1ण्53
हिण् प्रदेश 8 132 10995 10700 12 0ण्18
कर्नाटक 244 437 24774 1889900 4682 7ण्06
झारखंड 16 36 559 58500 3 4ण्44
केरल 119 509 41432 611700 2534 1ण्32
मध्यप्रदेश 191 165 8773 1618000 1419 12ण्19
महाराष्ट्र 234 171 9179 2929100 2689 13ण्49
ओड़िशा 142 165 2867 1107100 317 6ण्74
पंजाब 125 315 16443 345200 568 1ण्59
राजस्थान 44 338 42046 362900 1526 4ण्94
तमिलनाडु 228 368 23941 2135500 5113 9ण्61
उत्तरप्रदेश 88 266 10962 2129400 2334 19ण्94
जम्मू.कश्मीर 11 183 1099 14700 2 0ण्55
तेलंगाना 213 460 30335 1137300 3450 0
पण् बंगाल 229 205 7424 3230800 2399 10ण्19
भारत 160 289 16141 25039600 40416 144ण्33
स्रोत . कालम 2 से 5 एसएसएसओ रिपोर्ट क्रमांक 577 ;दिसंबर 2016 में जारीद्ध . भारत में घरेलू ऋणग्रस्तता
कालम 6 . एनएसएसओ द्वारा दिए गए आंकड़ों ;कालम 3 और कालम 4द्ध गणना
कालम 7 . 18 नवंबर 2016 को राज्य सभा में अतारांकित प्रश्न क्रमांक 326 के उत्तर में दी गयी जानकारी

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