उत्तर प्रदेश ने जारी किया नई खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति, यह होगा लाभ

उत्तर प्रदेश सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए नई नीति जारी कर दिया है। इसके तहत इस उद्योग को अगले पांच साल में ढाई गुना इजाफा किया जाएगा। सरकार फूड प्रॉसेसिंग यूनिटों को 10 से 50% तक अनुदान देगी। इस क्षेत्र में बड़े उद्योगों को आकर्षित करने के लिए उन्हें सुविधाएं और रियायतें भी दी जाएंगी। फूड पार्क बनाने के साथ छोटी इकाइयां लगाने के लिए भी सरकार मदद करेगी। उद्योगों को लगाने से लेकर निर्यात और परिवहन तक के लिए अनुदान दिया जाएगा।

प्रदेश में कृषि उत्पादों का महज 8% ही व्यावसायिक प्रसंस्करण किया जाता है जबकि कई विकसित देशों में यह आंकड़ा 80 से 90% तक है। प्रदेश सरकार ने नई नीति में इसे पांच साल में बढ़ाकर 20% करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षण देने के साथ फूड प्रॉसेसिंग यूनिट लगाने में भी सरकार मदद करेगी। इससे रोजगार और आय में बढ़ोतरी के साथ उपभोक्ताओं को भी अच्छे दाम पर उत्पाद मिल सकेंगे।
प्रदेश सरकार फूड प्रॉसेसिंग पार्क और मेगा पार्क स्थापित करने के लिए मदद करेगी। औद्योगिक विकास निगम के साथ निजी क्षेत्र के पार्कों को अनुदान दिया जाएगा। निवेश को आकर्षित करने के लिए उद्योग बंधु की तर्ज पर उद्यान बंधु की स्थापना की जाएगी। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत मंडल और जिलास्तर पर उद्योगों की स्थापना की जानकारी और सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उद्यान एवं प्रसंस्करण विभाग के कार्यालयों को भी कंप्यूटराइज्ड किया जाएगा, ताकि उद्यमियों को सभी जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकें।

ऐसे मदद करेगी सरकार
# खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए सरकार अधिकतम 50 लाख रुपये अनुदान देगी।
# केंद्र से स्वीकृत फूड प्रॉसेसिंग पार्क जिनकी न्यूनतम लागत 50 करोड़ रुपये से ज्यादा है, उनको राज्य सरकार भी 10% अतिरिक्त अनुदान देगी।
# ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ इकाई लगाने पर लागत का 50% और अधिकतम एक लाख रुपये अनुदान दिया जाएगा।
# नीति के क्रियान्वयन के लिए उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय नोडल निदेशालय होगा। निगरानी के लिए राज्यस्तर पर राज्य इम्पावर्ड कमिटी, मंडलीय अनुश्रवण समिति गठित की जाएंगी।

Related posts

Leave a Comment