किसानों के मुद्दों ने 2017 में मध्यप्रदेश को गरमाए रखा

मंदसौर में छह आंदोलनकारी किसानों की गोलीकांड में मौत, भोपाल में प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने वाली छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म और दुष्कर्मों के मामले में देश भर में सबसे ऊपर रहने जैसे अनेक कारणों से मध्यप्रदेश वर्ष 2017 में देश भर में सुर्खियों में रहा।
इस साल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत की प्रदेश की सात दिवसीय यात्रा और भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की तीन दिन तक राजधानी भोपाल में चली मैराथन बैठकों ने भी सबका ध्यान खींचा।
इसी बीच किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना, 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को मृत्युदंड प्रस्तावित करने वाला देश में अपनी तरह का पहला विधेयक, गुजरात चुनाव और कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी की ताजपोशी के दौरान कांग्रेस के कद्दावर महासचिव दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा भी देश भर में चर्चा बनी रही। महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर लगातार हो रही किरकिरी के दौरान संजय लीला भंसाली की फिल्म पद़्मावती को प्रदर्शन के पहले ही प्रदेश में प्रतिबंधित किए जाने और रानी पद्मिनी का स्मारक बनाए जाने की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा भी देश में सुर्खियों का सबब बनी।
अपनी मांगों के समर्थन में प्रदेश में एक जून से शुरु हुए आंदोलन ने कुछ ही दिनों में उग्र रुप ले लिया। प्रदेश के कई हिस्सों में आंदोलनकारियों ने न केवल दूध-सब्जियां सडक़ों पर फेंक दीं, प्रदेश के सबसे व्यस्त माने जाने वाले इंदौर-भोपाल राजमार्ग पर लग्जरी बसों को भी आग के हवाले कर दिया। छह जून को मंदसौर में हिंसक आंदोलनकारियों पर गोलीबारी में छह किसानों की मौत के बाद आंदोलन ने देश भर में बहस छेड़ दी।
प्रदेश सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगने के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में शांति बहाली की अपील करते हुए अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे। कई किसान संगठनों और मंदसौर गोलीकांड में मारे गए आंदोलनकारियों के परिजन से मुलाकात के बाद अगले दिन श्री चौहान ने मृतकों के परिजन को एक करोड़ रुपए के मुआवजे और मृतक के एक परिजन को शासकीय नौकरी के आश्वासन के साथ अपना उपवास तोड़ा।
किसानों की मौत और प्रदेश के मुखिया के उपवास ने प्रदेश में राजनीति गर्माए रखा। मुख्यमंत्री के उपवास के फौरन बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजधानी में तीन दिवसीय सत्याग्रह किया। कांग्रेस की प्रदेश इकाई के लगभग सभी दिग्गज इस दौरान सिंधिया के साथ मंच पर नजर आए।
मंदसौर की घटना से देश भर में हुई फजीहत के बीच मुख्यमंत्री चौहान ने इस साल सितंबर से किसानों के लिए देश में पहली भावांतर भुगतान योजना शुरु की। सरकार ने दावा किया कि इससे बिचौलियों का काम खत्म होगा। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा। इस साल देश की प्रमुख नदियों में से एक नर्मदा को लेकर भी प्रदेश चर्चा का विषय बना रहा। मुख्यमंत्री चौहान की पिछले साल शुरु हुई नर्मदा सेवा यात्रा का इस साल मई में समापन हुआ। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे। वहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की अपनी पत्नी अमृता राय के साथ नर्मदा परिक्रमा भी राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अटकलों का विषय रही। प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा सितंबर में अपने जन्मदिन पर सरदार सरोवर बांध देश को समर्पित करने के पहले नर्मदा किनारे के प्रदेश के हिस्सों में इसका पुरजोर विरोध हुआ। नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर ने जुलाई के अंत में बांध प्रभावित लोगों के पुनर्वास की मांग को लेकर धार जिले में भूख हड़ताल की। सुश्री पाटकर ने इसके बाद सितंबर में बांध लोकार्पण के ऐन पहले बड़वानी में आंदोलन के बहुत से कार्यकर्ताओं के साथ जल सत्याग्रह भी किया।
साभार: वार्ता

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