किसानों को मिला कांग्रेस का साथ, राष्ट्रपति के दरबार में पहुंचे

हरियाणा सरकार द्वारा दादूपुर नलवी प्राजैक्ट को डी-नोटीफाई किए जाने का मुद्दा राष्ट्रपति के दरबार में पहुंच गया। भारतीय कियान यूनियन ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के साथ मिलकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपते हुए हरियाणा सरकार द्वारा पारित प्रस्ताव को स्वीकृति न दिए जाने की मांग उठाई।
भारतीय किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चढुनी, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला, पूर्व विधायक अनिल धनतोड़ी, किसान नेता ईश्वर सिंह नैन समेत कई किसान प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति को दिए ज्ञापन में कहा है कि हरियाणा सरकार ने उत्तरी हरियाणा के लिए अति महत्वपूर्ण 32 साल पुरानी दादूपुर नलवी नहर परियोजना को रद्द करके किसानों की जमीन उन्हें वापस करने का फैसला किया है।
दादूपुर नलवी नहर परियोजना उत्तरी हरियाणा की जीवनरेखा है और इससे 225 गांवों की लगभग 1 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई का सीधा लाभ और लगभग इतनी ही अतिरिक्त जमीन को वाटर रिचार्जिंग के माध्यम से लाभ मिलना था। दादूपुर नलवी नहर परियोजना सन् 1985 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा शुरु की गई थी। अक्टूबर, 2005 में कांग्रेस ने ही एक बार फिर से इस योजना को चालू किया और किसानों को नहरी पानी उपलब्ध करवाने व भूजल स्तर उठाने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा शाहबाद फीडर, शाहबाद डिस्ट्रीब्यूटरी और नलवी डिस्ट्रीब्यूटरी के लिए 1019 एकड़ जमीन को अधिग्रहित किया गया।
जमीन अधिग्रहण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा अभी तक लगभग 200 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा सिंचाई विभाग द्वारा इन नहरों को बनाने में 111 करोड़ 17 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
किसान नेताओं के अनुसार पीडब्लूडी विभाग द्वारा भी सडक़ें बनाने में लगभग 100 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। 400 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने के बाद उत्तरी हरियाणा के गिरते भूजल स्तर को नया जीवनदान देने वाली इस परियोजना को रद्द करने से न केवल लाखों किसान परिवारों को सीधा नुकसान होगा, बल्कि पानी की कमी से जमीन में उर्वरता नहीं रहेगी। किसान नेताओं ने राष्ट्रपति से इस परियोजना को रद्द करने का फैसला करने के लिए लाए जा रहे बिल को अनुमति न देने की मांग करते हुए कहा कि इससे देश की 1 लाख हैक्टेयर से अधिक जमीन बंजर हो जाएगी, सरकार द्वारा खर्चे 400 करोड़ रु. बेकार चले जाएंगे और लाखों किसानों को भारी नुकसान होगा और वो सरकार द्वारा दिए गए मुआवजे को वापस करने की स्थिति में भी नहीं होंगे।

नहर को पाटने पर खर्च होंगे लाखों रुपए
किसान नेताओं ने राष्ट्रपति को दिए ज्ञापन में कहा है कि लगभग 58 फुट चौड़ी व 30 फुट गहरी इस नहर को पाटने में किसान को प्रति एकड़ लगभग 40 लाख रुपए का खर्चा आएगा, जो भूमि की कीमत के बराबर है। इसके अलावा किसानों को पहले दिए जा चुके मुआवजे की राशि वापस करने के लिए किसान को लगभग 10 लाख से 20 लाख रुपए प्रति एकड़ सरकार को देने होंगे। किसान वर्ग पहले ही सरकार की गलत नीतियों के चलते हताश और निराश है।
अधिग्रहण की जमीन पर बन चुके हैं पुल
किसान नेताओं द्वारा राष्ट्रपति को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिग्रहण की गई भूमि पर 10 किलोमीटर से अधिक तो सडक़ व राष्ट्रीय राजमार्ग के अनेक पुल पहले ही बन चुके हैं। सरकार के आदेश लागू करते समय सडक़ों को नए सिरे से उखाडऩा होगा,पुलों को तोडऩा होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग-73 की अलाईनमेंट भी नए सिरे से करनी पड़ेगी। सरकार के इस फैसले से दादूपुर नलवी नहर के साथ-साथ सरस्वती प्रोजेक्ट भी अपने आप बंद हो जाएगा।

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