कैप्टन की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से मुलाकातः एसवाईएल जल बंटवारे पर हू तू तू शुरु

पंजाब में सत्ता परिवर्तन के साथ सिंचाई केलिए सतलुज यमुना लिंक नहर के पानी को लेकर खींच-तान शुरु हो गई है। पंजाब के नवनियुक्त मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह के वृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मिलने के कार्यक्रम को यूं तो शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है, पर बदलते घटनाक्रम से लगता है कि वे जल्द मसले का हल चाहते हैं। बाद में समस्या जटिल होने पर बड़ा सियासी बवंडर खड़ा हो सकता है।

Malick Asgher Hashmi Director of khetbazaar.com
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पूर्व मुख्यमंत्री बादल और मौजूदा मुख्यमंत्री एसवाईएल जल बंटवारे पर समान नजरिया रखते हैं। दोनों नहर की एक बूंद भी हरियाणा को देने के पक्ष में नहीं हैं। दलील है कि पंजाब खुद जल संट से घिरा है। एसवाईएल में पानी नहीं है। ऐसे में हरियाण को पानी देना संभव नहीं है। विधानसभा चुनाव के दौरान यह मुद्दा सियासी दलों के बीच ‘हॉट केक’ बना हुआ था।
कैप्टन अमरेंद्र्र सिंह अच्छी तरह समझते हैं कि चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में बंपर बहुमत मिलने के बाद केंद्र एवं हरियाणा की भाजपा सरकार एसवाईएल मुद्दे पर उन्हें झुका कर बड़ी परेशानी खड़़ी कर सकती है। जल बंटवारे पर हरियाणा के कांग्रेसी साथी भी उनका साथ नहीं देंगे। ऐसा करने से हरियाणा में खुद उनकी राजनीति हाशिए पर आने का खतरा है। यह भांपकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रचार करने केलिए पंजाब जाने से मना कर दिया था।
इधर, पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आते ही एसवाईएल पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने भी पंजाब पर दबाव बढ़ाना आरंभ कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जल बंटवारा पर हरियाणा के हक में फैसला आने के बाद खट्टर की कोशिश है कि राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इसमें हस्ताक्षेप कर इसका हल निकालें।
दक्षिण हरियाणा में सिंचाई का स्थायी स्रोत नहीं है। एसवाईएल के पानी से सबसे अधिक लाभ इस क्षेत्र को होगा। इसपर बातचीत केलिए खट्टर ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय मांगा है, जबकि कैप्टन ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भेंट करने के साथ कानूनी पहलुओं की समीक्षा केलिए पंजाब के नए एडवोकेट जनरल अतुल नंदा को लगा दिया है। कैप्टन के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल कहते हैं कि प्रधानमंत्री या प्रणव मुखर्जी से मुलाकात के समय एसवाईएल पर सीधी चर्चा नहीं होगी, पर राज्यों के साथ बैठक को लेकर सहमति या ट्रिब्यूनल बनाने पर औपचारिक बात हो सकती है।

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