ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस कनेक्शन के साथ 1 करोड़ 35 लाख लोगों को मिलेगा मकान

ग्रामीण विकास विभाग की 2018-19 में देश के एक करोड़ 35 लाख बेघरों को मकान देने की योजना है। इसे सिरे चढ़ाने को 33 लाख मकान 2017-18 तक निर्माण कराने की मंजूरी मिलने वाली। केंद्र सरकार चाहती है कि 2022 तक सब के लिए आवास का इंतजाम हो जाए।
ग्रामीण विकास विभाग को राज्यों से मिली रिपोर्टों के अनुसार, 2016-17 में 32.14 लाख मकान बनाया लिया गया है। पीएमएवाई-जी के कार्यान्वयन में मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और असम ने पीएमएवाई-जी के कार्यान्वयन में अग्रणी है। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, झारखंड, राजस्थान और महाराष्ट्र में भी इंदिरा आवास योजना के तहत अधूरे मकानों के निर्माण का कार्य बड़े पैमाने पर पूरा कर लिया गया है।
उललेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी ने 20 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की शुरूआत की थी। इस नए कार्यक्रम के तहत घरों की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने की योजना बनाई गई है। इन घरों में रसोईघर, शौचालय, रसोई गैस कनेक्शन, बिजली कनेक्शन और जलापूर्ति की सुविधा भी होगी। लाभार्थी अपनी आवश्यकता के अनुसार घरों की योजना भी तैयार कर सकता है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण राजगीरों को प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम भी शुरू कर दिया गया है, ताकि बेहतर निर्माण के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध हो सके। लाभार्थियों के चयन के लिए सामाजिक-आर्थिक जनगणना (एसईसीसी) के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। ये आंकड़े बे-घरबार लोगों या कच्ची छत वाले 0, 1, 2 कच्चे कमरों पर आधारित है। एसईसीसी आंकड़ों को ग्राम सभा द्वारा मान्यता प्राप्त है, ताकि किसी प्रकार की गलती न हो। वर्ष 2016-17 के लिए कुल 44 लाख मकानों को स्वीकृति दी गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय पूरा प्रयास कर रहा है कि इन्हें दिसंबर, 2017 तक पूरा कर लिया जाए।

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