छत्तीसगढ़ के किसान पशु शव से सीख रहे जैविक खाद बनाना

छत्तीसगढ़ में जैविक खेती को बढ़ावा देने के नए आयामों के साथ अब बस्तर में डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसानों को गौ-पालन से होने वाले अन्य लाभों की जानकारी दी जा रही है। वहां के किसान पशुओं के मृत्य शरीर से जैविक खाद बनाना सीख रहे हैं।

कामधेनु विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक किसानों को गौ-मूत्र से कीटनाशक और इसके मृत शरीर से बेहतर जैविक खाद बनाने का विधिवत प्रशिक्षण दे रहे हैं। तकनीकी सहायक यशवंत अडवैय्या ने बताया कि बस्तर जिले के सातों ब्लाक में किसानों और गौपालकों को गाय के जीवित रहने से लेकर मरने के बाद तक का उपयोग विस्तार से बताया जा रहा है। पहले चरण में हर ब्लाक में सौ-सौ किसानों को प्रशिक्षित किया गया है। भास्कर की एक खबर में कहा गया है कि शहर से लगे तुरेनार में किसानों को खाद समाधि तैयार करने की जानकारी दी गई। इसके लिए मृत गाय को खेत में 5 फीट लंबा, 5 फीट चौड़ा और 5 फीट गहरा गड्ढा खोदकर मृत गाय के शरीर को लिटा देते हैं। इस गड़्ढे में 3 सौ किलो गोबर और सौ किलो खड़ा नमक डालकर गड़्ढे को मिटटी से ढक दिया जाता है।
इस विधि में पूरे एक साल बाद निकाल कर उसका खाद का उपयोग किया जाता है। जिससे खेत कि मिटटी को भरपूर कैल्शियम व फासफोरस मिलता है। किसान कमल बधेल ने बताया कि कम खर्च में जैविक खाद तैयार किया जा सकता है। उसने भी पालतू गाय के मरने के बाद इस विधि से खाद समाधि बनाने की सोची है।

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