टपका विधि से सिंचाई से घटेगी लागत

हरियाणा राज्य में सभी स्रोतों से उपलब्ध पानी का 80 फीसदी पानी सिंचाई में खर्च होता है। यह प्रचलन आने वाले समय में गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है इसलिए किसान टपका सिंचाई विधि तथा फव्वारा प्रणाली का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें ताकि आने वाली पीढ़ी के लिए जल बचाया जा सके। यह बात चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांलसर डॉ. जेसी कत्याल ने

खेतबाज़ार.कॉम

से बात करते हुए बताई।
श्री कत्याल ने कहा कि किसान तभी बचत कर सकता है जब वह आठ मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देगा। इनमें सही बिजाई, सही किस्म, सही खाद, उचित मात्रा में पानी, बीमारी की रोकथाम, कटाई, रख-रखाव तथा मार्केटिंग शामिल हैं। इन सभी पर गंभीरता से कार्य करना उन्नत खेती कहलाता है। उन्होंने कहा कि अगर किसान नई उन्नत व सही खेती को अपनाएंगे तो राज्य में कम से कम 12 लाख अतिरिक्त लोगों को काम मिल सकता है।
कत्याल ने कहा कि आज फर्टीगेशन का जमाना है जिसमें पानी के साथ-साथ खाद उचित मात्रा में पहुंचाई जा सकती है। इससे एक तरफ जहां पानी की बचत होगी वहीं पौधे को उसकी जरूरत के अनुसार आवश्क तत्व मिलेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को एक साथ मिलकर नहरी पानी के बचाने के तरीके अपनाने होंगे। इसमें कच्चे खालों के बजाए पाइप के माध्यम से किसान सांझा टैंक आदि बनाकर अपने खेतों में सिंचाई कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सही ढंग से सिंचाई करके किसान खेती के उत्पादन में आने वो खर्च को 25 फीसदी तक कम कर सकते हैं।

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