दस रुपये का सिक्का लेने से किया इनकार तो जाओगे जेल

सिक्का अमान्य नहीं है। सभी चलन में हैं। समय-समय पर जारी अलग डिजाइन के सिक्के आज भी पहले की तरह चल में हैं। इसे लेकर किसी तरह के भ्रम में पड़ने की आवश्यकता नहीं है। इसको लेकर सर्वाधिक ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रम है।
भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि शेरावाली, संसद और बीच में ‘10’ लिखा हुआ, होमी भाभा की तस्वीर वाला, महात्मा गांधी की तस्वीर वाला सिक्का सहित अन्य सभी दस के सिक्के पहले की तरह चलन में हैं। इन सिक्कों को विशेष मौकों पर जारी किया गया है। इनमें से किसी को चलन से बाहर बताने या लेन-देन में आना कानी करना पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
दस रूपये के सिक्के के लेनदेन को लेकर अक्सर विवाद होता रहता है। आम लोगों का कहना है कि दस पत्ती वाला वही सिक्का मान्य है जिसमें 10 का अंक नीचे की तरफ लिखा है। इसकी दूसरी तरफ शेर का अशोक स्तंभ अंकित है।
एक समाचार एजेंसी के मुताबिक, कॉरपोरेट मामलों के वकील शुजा ज़मीर ने कहा कि ‘‘भारत की वैध मुद्रा को लेने से इनकार करने पर राजद्रोह का मामला बनता है। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 के तहत कार्रवाई हो सकता है। मुद्रा पर भारत सरकार वचन देती है। इसको लेने से इनकार करना राजद्रोह है।’’अभी देश के कई हिस्सों में दस रूपये के सिक्को को लेकर भ्रम की स्थिति है। कई दुकानदार इन सिक्कों को लेने से मना कर देते हैं।
सबसे ज्यादा विवाद बीच में ‘10’ लिखे सिक्के को लेकर है। आरबीआई ने जानकारी दी है कि यह सिक्का 26 मार्च 2009 को जारी किया गया था। केंद्रीय बैंक वक्त वक्त पर आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक थीम पर सिक्के जारी करता रहता है। सिक्के लंबे समय तक सही रहते हैं इसलिए यह मुमकिन है कि बाजार में अलग अलग डिजाइन और छवि के सिक्के हों, जिनमें बिना ‘रूपये’ के चिन्ह वाले सिक्के भी शामिल हैं।
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