प्रभावित फसलों लिए केंद्र सरकार ने एक्शन प्लान तैयार किया

हिमालयी क्षेत्रों में घटते-बढ़ते तापमान के कारण प्रभावित फसलों को किस प्रकार बचाया जा सकेगा इसके लिए केंद्र सरकार ने एक्शन प्लान तैयार किया है। भारतीय मृदा एवं जलसंरक्षण संस्थान के वैज्ञानिक इस योजना पर शोध करके पहाड़ी क्षेत्रों में असंतुलित तापमान का पता लगाएंगे। इसके बाद लोअर मिडल और कोल्ड एअर हिमालयी क्षेत्रों की कृषि पर वैज्ञानिक तरीके से सुधार कर किसानों को सुविधा प्रदान की जाएगी।

नेशनल मिशन फार सस्टेनिंग हिमालयन इको सिस्टम (एनएमएसएचइ) में हिमालय से सटे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उत्तर पूर्वी सभी राज्य और लद्दाख क्षेत्र को शामिल किया गया है। इसे टास्क फॉर सिक्स का नाम भी दिया गया है। इन क्षेत्रों में ऐसा शोध पहली बार होगा।

उत्तराखंड के चकराता और अल्मोड़ा में शोध शुरू

नेशनल मिशन फार सस्टेनिंग हिमालयन इको सिस्टम के तहत भारतीय मृदा एंव जल संरक्षण संस्थान दून के वैज्ञानिकों ने हिमालयी तापमान पर अपना शोध शुरू कर दिया है। इसके लिए सबसे पहले उत्तराखंड के चकराता और अल्मोड़ा क्षेत्र का चुना गया है। यहां वैज्ञानिक मौजूदा तथा पूर्व के तापमान से कृषि क्षेत्र पर पड़ रहे असर का पता लगा रहे हैं। साथ ही वर्षा तथा वर्षा न होने की स्थिति में हिमालयी क्षेत्रों की फसलें किस हद तक प्रभावित हो रही हैं। इस पर भी शोध चल रहा है। ऐसे क्षेत्रों में किस तापमान में फसल सर्वाधिक सुरक्षित रह सकेगी। इस पर भी शोध चल रहा है।

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हिमालयी क्षेत्रों में तापमान असंतुलित रहता है। जिस कारण यहां कृषि क्षेत्र में क्रांति नहीं आ पाती। इसी पर वैज्ञानिक पहली बार शोध कर रहे हैं। उम्मीद है कि वैज्ञानिकों की शोध रिपोर्ट आगामी 3-4 महीनों में प्राप्त हो जाएगी।

– डा. प्रशांत कुमार मिश्रा, निदेशक, भारतीय मृदा एंव जलसरंक्षण

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