मध्यप्रदेश सरकार ने माना किसानों की आत्महत्या की बात

मध्यप्रदेश से कर्ज से परेशान होकर किसान और कृषि मजदूरों की खुदकुशी की लगातार खबरें आ रही हैं। सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में इस मामल को उठाया गया। विधायक बाला बच्चन के सवाल का जवाब देते हुए गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ठाकुर ने माना कि तीन साल में इंदौर संभाग के आठ जिलों में 450 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। वे सभी कृषि व्यवसाय से जुड़े थे।
मध्यप्रदेश ने माना कि इनमें से 4 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने कर्जे से परेशान होकर आत्महत्या की। सबसे खराब स्थिति बड़वानी जिले की है। तीन महीने में 8 मौतें हो चुकी हैं। गृहमंत्री सिंह ने बताया गृह विभाग द्वारा किसानों एवं एवं कृषक मजदूरों द्वारा आत्महत्या के आंकड़े अलग से संकलित नहीं किए जाते हैं लेकिन आप्रकृतिक मृत्युओं की जांच में इंदौर संभाग में बीते 2 साल में 266 ऐसे व्यक्तियों ने आत्महत्या की गई, जिनका व्यवसाय कृषि था।
एक आंकड़ों के अनुसार तीन सालों में झाबुआ में सबसे ज्यादा 128 कृषि मजदूरों और किसानों ने आत्महत्याएं की है। 2015 में 61, 2016 में 65 और 2017 में 2 आत्महत्याएं दर्ज हुई हैं।

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