महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों को भारी घाटे का अंदेशा

महाराष्ट्र की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव अच्छे संकेत नहीं दे रही है। मंडी में प्याज की आमद और मिल रहे दाम से साफ है कि महाराष्ट्र के किसानों को लगातार दूसरे वर्ष भारी घाटा उठाना पड़ सकता है। मंडियों में नई प्याज की आवक शुरू हो गई है, पर किसानों को वाजिब दाम नहीं मिल रहे हैं। किसान लागत से आधी कीमत पर प्याज बेचने को मजबूर हैं।
लासलगांव प्याज मंडी में शुक्रवार को प्यााज के दाम 400 रुपये से 550 रुपये प्रति क्विंटल रहे। प्याज का यह स्तर पांच साल में सबसे कम है। यानी पिछले साल की तरह इस बार भी किसानों को प्याज जलाने, खेत में जोतने जैसे आंदोलन करने पड़ सकते हैं।
‘मनी भास्कर’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि मंडी में अभी प्रतिदिन 40 हजार क्विंटल प्याज की आवक है। लासलगांव कृषि उत्पादन मंडी समिति के चेयरमैन जयदत्त होल्कर ने बताया कि इस वक्त मंडी में उना और लाल प्याज की नई फसल आ रही है। इस साल महाराष्ट्र में प्याज की फसल करीब 20 फीसदी कम क्षेत्रफल में हुई है, पर मौसम अच्छा होने के कारण पैदावार बेहतर हुई है।
पिछले साल महाराष्ट्र के सूखे की चपेट में होने पर भी प्याज का उत्पादन करीब 197 लाख टन हुआ था। इस साल मौसम फसलों के अनुकूल रहा, इसलिए उत्पादन 2 करोड़ टन के आसपास पहुंचने का अनुमान है।

अभी किसानों को एक क्विंटल प्याज उगाने पर करीब 900 से 950 रुपए खर्च करने पड़ते हैं, पर मंडी में दाम महज 400 से 550 रुपए मिल रहे हैंं, जो लागत का आधा है। वेजेटेबल ग्रोअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यलक्ष श्रीराम गढावे ने बताया यदि यह हाल रहा तो किसानों को इस बार करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है।
दरअसल, देश में प्या्ज को स्टोेर करने के लिए गोदामों की बेहद कमी है। पिछले साल केंद्र सरकार ने प्रत्येक राज्य को अपने स्तर से गोदाम बनाने के निर्देश दिए थे। चूंकि इतने बड़े इंफ्रास्ट्रिक्चर को खड़ा करने में कई साल लग जाते हैं। लिहाजा, स्टोरेज और प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में इस वर्ष किसानों को मनमर्जी दाम मिलने की उम्मीद न के बराबर है।

Related posts

Leave a Comment