यूपी दिखाएगा औषधीय एवं सुगंध देने वाले पौधों की खेती की राह

लखनउ का केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान सुगंध देने वाले पैधों पर विशेष काम कर रहा है। यहां सूखाग्रस्त बुंदेलखं में नींबू की खुशबू देने वाले घास लेमन ग्रास की विशेष प्रजाति विकसित की जा रही है। यह कहना है संस्थान के निदेशक डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी का। वह मंगलवार को संस्थान के वार्षिकोत्सव में बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड के लिए लेमन ग्रास की प्रजाति विकसित की गई है। इसपर सूखे का असर नहीं होता। जम्मू कश्मीर में एक परियोजना के तहत बंजर इलाके में सुगंध युक्त पौधों की खेती शुरू कराई गई है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय औषधीय एवं सुगंध पौधा संस्थान एक खास परियोजना पर काम कर रहा है ताकि देशभर में साढ़े पांच हजार से छह हजार हेक्टेयर क्षेत्र में चुनी हुई सुगंध युक्त पादप प्रजातियों की खेती को बढ़ावा दिया जा सके। आने वाले समय में देशभर में 50 से 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंध युक्त पौधों की खेती कराने की योजना है।
इस मौके पर उन्होंने संस्थान द्वारा जड़ी-बूटी से तैयार खांसी सिरप भी प्रदर्शित किया, जो बिना नींद लाए एलर्जी जनित खांसी में लाभ पहुंचाता है। जड़ी-बूटी से तैयार मच्छर भगाने की दवा भी तैयार की गई है, जो काफी पसंद की जा रही है। उत्तर पूर्व के क्षेत्रों में इस दवा में इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी बूटियों की खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगा।
केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान के निदेशक ने बताया पिछले एक वर्ष में संस्थान के वैज्ञानिकों के 95 शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं , जबकि तीन पेटेंट दाखिल किए गए हैं। संस्थान की ओर से खस, मेंथाल तथा अन्य सुगंधित तेल युक्त पौधों की चार नई प्रजातियां विकसित की गईं। केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान के स्थापना दिवस समारोह में अनेक वैज्ञानिकों को शोध के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। संस्थान द्वारा आयोजित औषधीय एवं सुगंधियुक्त पौधों की फोटो प्रतियोगिता के विजेता भी पुरस्कृत किए गए। समाचार एजेंसी वार्ता के अनुसार, संस्थान ने मुहासे दूर करने वाली जड़ी बूटियों से तैयार दवा भी लांच की।

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