राष्ट्रीय सम्मेलन में दिए जाएंगे उपज के टिप्स

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अप्रैल के अंतिम सप्ताह में खरीफ अभियान 2017 के तहत आयोजित होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से भाग लेने आने वाले प्रतिनिधियों के समक्ष खरीफ फसलों से संबंधित अनुसंधान, रणनीति और योजानाएं रखने के लिए नई दिल्ली में एक बैठक हुई। अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और कृषि प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जनवरी से बैठकों का दौर जारी है, जिसमें पशुपालन, डेरी एवं मत्स्य पालन को लेकर लगातार चर्चाएं हुईं। इसमें आने वाले सुझाव ही राष्ट्रीय सम्मेलन में रखे जाएंगे।
दो दिन पहले बैठक में फसल, बीज, पौधों के संरक्षण, बागवानी, खेती के मशीनीकरण, प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, एकीकृत पोषण प्रबंधन जैसे विषयों पर विचार किया गया। इसमें हिस्सा लेने वालों की राय थी कि मंत्रालय के तीनों विभागों के बीच नजदीकी समन्वय और सहयोग होना चाहिए ताकि खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और कृषि क्षेत्र का विकास हो सके। बैठक की अध्यक्षता एसी एंड एफडब्ल्यू के सचिव और सह-अध्यक्षता कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव ने की।

चर्चा में आए सुझाव
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-2011 के बाद आईसीएआर द्वारा जारी फसलों की विभिन्न किस्मों को भारत भर में प्रोत्साहित करना ताकि अन्य किस्में भी उपलब्ध हो सके।
-राज्य सरकारों से आग्रह किया गया कि 2011 के बाद जारी होने वाली अऩुमोदित किस्मों के बीजों को अपन राज्यों में तैयार रखें।
– गुण और जेनेटिक शुद्धता तय करने के लिए जारी होने वाली किस्मों की डीएनए पहचान का ब्योरा तैयार किया जाए।
– विभिन्न स्रोतों की पहचान कर तिलहन और दलहन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए जिप्सम उपलब्ध रहे। जमीन की गड़बड़ियों का उपचार किया जाए।
-डीएआरई के सचिव ने मूंगफली, सूरजमुखी और केस्टर की ट्रांसजैनिक किस्मों के विकास पर बल दिया।
– गन्ने की खेती के लिए ड्रिप सिंचाई प्रौद्योगिकी को अपनाने पर जोर दिया गया।
– नई दिल्ली स्थित आईएआरआई में शहर की जांच करने के लिए एक समेकित प्रयोगशाला बनाई।
– उचित प्रौद्योगिकीयों के जरिए किसान समुदाय की समस्याओं का हल किया जाए

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