रुपया मजबूत होना कृषि क्षेत्र के लिए बना चुनौती

रुपया मजबूत होने से कृषि क्षेत्र के लिए चुनौती बन रहा है। अगर रुपये की मजबूती इसी तरह जारी रहा तो इसका असर कृषि निर्यात पर पड़ेगा। कृषि निर्यात को संभालने के लिए रिजर्व बैंक को भी कदम उठाने पड़ेंगे। यह बात विश्व की प्रसिद्ध वित्तीय शोध एजेंसी ईडलवाइस के सिक्योरिटी लिमिटेड ने अपने वार्षिक में कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि व्यापार पर रुपये की कीमत में उतार चढ़ाव का व्यापक असर पड़ता है। जैसे-जैसे रुपये में मजबूत हो रहा है, कृर्षि क्षेत्र के लिए चुनौती पेश कर रहा है।
रिपोर्ट में तर्क दिया गया कि जब २०१०-१३ के दौरान वैश्विक बाजार में रुपया कमजोर था तो उस समय भारतीय कृषि निर्यात में २४ फीसदी बढ़ोतरी हुई थी, रुपये के मजबूती के दौर में वर्ष २०१३-१५ के दौरान यह निर्यात कम हुआ। निर्माण क्षेत्र को लाभ मिला और कृषि में गिरावट दर्ज हुई है। 2015-16 में वैश्विक खाद्य मूल्यों में गिरावट आने के मद्देनजर भारत के कृषि वस्तुओं के निर्यात में भी कमी आयी थी। रुपया मजबूत होने से कृषि वस्तुओं का आयात सस्ता हो गया है जिसके चलते सरकार को गेहूं और दालों पर आयात शुल्क लगाना पड़ा है।
रिपोर्ट में कहा गया कि बीते पांच महीने में रुपया डॉलर के मुकाबले 68 रुपये से चढ़कर 64 रुपये पर आ गई है। भारत कृषि वस्तुओं का शुद्ध निर्यातक है। वित्त वर्ष 2016-17 में भारत ने 33.2 अरब डॉलर की कृषि वस्तुओं का निर्यात किया है जिसमें सर्वाधिक मत्स्य उत्पाद और अनाज शामिल हैं।

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