सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से किसानों की आत्महत्या पर मांगा जवाब

उच्चतम न्यायालय देशभर में किसानों की बढ़ती आत्महत्या की घटना को लेकर बेहद चिंतित है। कोर्ट ने केेंद्र सरकार से पूछा है कि इस समस्या से निपटने केलिए वह क्या उपाए कर रही है।
मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने इसपर सुवाई करते हुए सरकार को चार सप्ताह के भीतर समस्या सेे निपटारे को लेकर किए जाने वाले उपायों की जानकारी देने को कहा है। केंद्र ने जवाब दाखिल करने केलिए कोर्ट से दो सप्ताह का समय मांगा था, पर विषय की गंभीरता को समझते हुए सर्वाेच्च न्यायालय ने चार सप्ताह की मोहलत दे दी। सुप्रीम कोर्ट किसानों की दुर्दशा पर एक एनजीओ द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
समाचार एजेंसियों के मुताबिक, उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए किसानों की आत्महत्या को गंभीर मुद्दा बताया। केेंद्र को उन वजहों से निपटना का सुझाव दिया जिसके कारण ऐसी नौबत आई है। कोर्ट का कहना है कि मसले से निपटने केलिए प्रस्तावित नीति लानी चाहिए ताकि किसान आत्महत्या को मजबूर न हों। इसपर अतिरिक्त सालिसिटर जनरल पीएस नरसिंह ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सरकार एक विस्तृत नीति लाएगी ताकि किसानों से जुड़े मुद्दे निपटाए जा सकें। उन्होंने कहा कि इस क्रम में सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सीधे किसानों से खाद्यान्न खरीद रही है। फसल में नुकसान या बर्बाद होने पर मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों का बीमा कवर भी बढ़ाया गया है। एनजीओ ‘सिटिजन्स रिसोर्स एंड एक्शन एंड इनीशिएटिव’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंसाल्वेज ने कोर्ट को बताया कि पिछले कुछ वर्ष में तीन हजार से अधिक किसान खुदकुशी कर चुके हैं।

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