हवा में तैयार होगा आलू बीज

पंजाब के कृषि विज्ञानी हवा में आलू बीज तैयार करने की एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जिससे 150 गुणा से अधिक बीज तैयार किया जा सकेगा। पंजाब बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ सतवीर सिंह ने यहां बताया कि सूबे के धोगड़ी स्थित ‘सेंटर आफ एक्सीलेंस फॉर पोटेटो’ ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है जिससे बिना मिट्टी के हवा में आलू की उन्नत किस्म का बीज तैयार किया जा सकेगा। सीआरपीआई द्वारा ईजाद ऐयरोपोनिक तकनीक से आलू के क्षेत्र में एक क्रांति आएगी। इस तकनीक से एक ही पौधे से चार वर्षों में पारंपरिक बीज के 2250 टयुवर के मुकाबले दो लाख 64 हजार 500 टयुवर तैयार होंगे। सेंटर आफ एक्सीलेंस फार पोटेटो के परियोजना अधिकारी डॉ परमजीत सिंह की देखरेख में ऐयरोपोनिक तकनीक से आलू का बीज तैयार करने की योजना पर कार्य चल रहा है। वार्ता की एक खबर के अनुसार, इस तकनीक से धोगड़ी केन्द्र में कुफरी बादशाह, कुफरी पुखराज, कुपरी ज्योती, कुफरी ख्याती, कुफरी लोवकर, कुफरी चिपसोना, कुफरी हिमालनी तथ कुफरी अरूण किस्म का बीज तैयार हो रहा। यह बीज अगले दो वर्षों में किसानों के लिए उपलब्ध हो जाएगा। फसल की बिजाई से लेकर खुदाई तक ज्यादा से ज्यादा मशीनीकरण के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जाएगा जिसके लिए उक्त केन्द्र में डच तथा जापानी मशीनों को प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल भी किया गया है। राज्य में उन्नत किस्म के आलू बीज की मांग के मद्दे नजर हिमाचल प्रदेश में स्थित आईएचबीटी तथा जालंधर में सीपीआरएस बादशाहपुर में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। पेरिस, इंग्लैंड और फ्रांस में आलू बीज की प्रयोगशालाओं का दौरा करने के पश्चात ऐयरोपोनिक तकनीक अपनाया गया है। इस तकनीक से एक ही पौधे से पारम्परिक तकनीक से तैयार होने वाले बीज की अपेक्षा 150 गुणा ज्यादा बीज तैयार होगा।
डॉ परमजीत सिंह ने बताया कि साल 2022 तक पंजाब के लगभग 59 हजार हेक्टेयर रकबे के लिए उन्नत किस्म का बीज उपलब्ध हो जाएगा। उन्होंने बताया कि धोगड़ी केन्द्र में किए जा रहे प्रयोगों के परिणाम किसानों तक पहुंचने से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। केन्द्र में भविष्य में किसानों को आलू फसल की बिजाई से लेकिर खुदाई तथा रखरखाव तक गुड एग्रीक्लचर

प्रोसीजर (जीएपी), मशीनीकरन तथा भण्डारण संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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