बदलते मौसम से गेहूं को रतुए का खतरा

कभी सर्दी तो कभी गर्मी। बारबार मौसम बदने से हरियाणा में गेहूं की फसल पीले रतुए ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। दिन में मौसम तीन रंग दिखते हैं सुबह कोहरा, दोपहर में तेज धूप व शाम को कोहरा देखने को मिल रहा है। मौसम में इस तरह की नमी आगे भी रही तो गेहूं की फसल पर पीला रतुए का प्रकोप और बढ़ जाएगा। ज्यादातर ऐसे मौसम में हवा में नमी बढ़ती है। दिन में तापमान बढ़ता है। दिन के समय तापमान बढ़ेगा तो ऐसे वातावरण में रतुआ फसल के लिए अनुकूल हो जाता है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो किसानों को गेहूं की फसल का विशेष ध्यान रखें। पीला रतुआ के प्रकोप से गेहूं के पौधे में फलैग लीफ ;सबसे मुख्य पत्तीद्ध में फोटो सिंथेसिस ;प्रकाश संश्लेषणद्धकी क्रिया रुक जाती है। धूप में निकलने से पत्ती में क्लोरोफिल ;सूर्य रोशनी प्राप्त कर पीओ का रंग हरा कर देने वाला तत्वद्ध नहीं बनता है। पौधा अपनी खुराक;भोजनद्ध नहीं बना पाता। जिसकी वजह से पौधा मुरझाने लगता है और जिसकी वजह से पौधे का बढ़ना रुक जाता है अच्छी पैदावार के नहीं दे पाता यह बिमारी पौधे के लिए यह घातक है।
पीला रतुआ;येलोरस्टद्ध
पीला रतुआ एक फंगस इंफेक्शन है। वह सुप्तावस्था में मिट्टी में पड़ा रहता है जैसे हवा में आद्रता बढ़ती है और इसके साथ अगर तापमान बढ़ता है तो पीला रतुआ के फंगस सक्रिय हो जाते हैं। यह हवा के माध्यम से गेहूं की पत्तियों पर अपना प्रकोप दिखाते है। पतियों पर ऊपर नीचे दोनों ओर पाऊडरनुमा पीले धब्बे निशान पड़ जाते हैं। कृषि विशेषज्ञ उमेद खिचड़ का कहना है कि इससे गेहूं के पत्ते हल्दी रंग के हो जाते है। उससे क्लोरोफी बन बंद हो जाता है ग्रोथ रूक जाता है। उसका पैदावार पर काफी फर्क पड़ता है। उनका कहना है कि येलोरस्ट का ज्यादा प्रभाव गेहूं की 2851 वैरायटी पर पड़ता है। 2851 एक गेहूं की वैयायटी है। जो अन्य वैरायटियों के बदले ज्यादा पैदावार देती है। हालांकि यह वैरायटी खेती के लिए रिकमैंडिड नहीं है लेकिन किसान गेहूं की ज्यादा पैदावार के चक्कर में इसी वैयायटी पर भरोसा जताते है। येलोरस्ट का इसी वैरायटी पर हमला बोलता है।
ऐसे करें रोकथाम
कृषि विकास अधिकारी भागीरथ का कहना है कि पीला रतुआ की रोकथाम के लिए किसान रोजाना सुबह अपने खेतों का निरीक्षण करें। यदि उनको गेहूं के पत्ते पर पीले रंग का निशान या यलोरस्ट ;पीला रतुआद्ध के लक्षण दिखाई दे तो मौसम साफ होने पर प्रोपीकोनाजोल 200 एमएल को 200 लीटर पानी में घोल कर प्रति एकड़ गेहूं की फ सल पर स्प्रे करें।

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