कैंसर व एड्स से लड़ेगा खास शिटाके मशरुम

कैंसर व एड्स से लड़ेगा खास शिटाके मशरुम

मशरूम की एक विशेष प्रजाति शिटाके अब कैंसर और एड्स जैैसे भयानक रोगों से लड़ेगा। इस खास किस्म के मशरूम को हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के विशेषज्ञों ने किसानों के साथ मिलकर तैयार किया है। यह मशरूम कैंसर की दवा लैंटाइनन का मुख्य स्रोत है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट अधिक होने के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, जिससे एड्स व कैंसर जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
एचएयू के वैज्ञानिकों का दावा है कि इसका उत्पादन आसान तकनीक से किया जा सकता है और कम आय वाले किसान भी इसका उत्पादन कर अच्छी कमाई कर सकते है। एचएयू के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. सुरजीत सिंह ने बताया कि आम तौर पर छह से नौ माह में तैयार होने वाले इस शिटाके मशरूम को एचएयू ने महज 90 दिनों में इसके उत्पादन का तरीका ईजाद किया है। इसे झोपड़ी में भी उगा सकते हैं। हरियाणा के किसान सर्दियों में इसे लगा सकते हैं। दिसंबर में इसकी खेती शुरू करें तो मार्च तक यह तैयार हो जाती है। बता दें कि हिमाचल के किसान करीब दो हजार रुपये किलो के दाम में इसे बेचते हैं।

इस प्रकार उगा सकते हैं यह खास मशरूम
-जिस स्थान पर यह मशरूम लगाना है उस कमरे की नमी 90 फीसद होनी चाहिए। इसके लिए कमरे में पानी का छिड़काव किया जा सकता है।
-सबसे पहले लकड़ी के बुरादे को एक लिफाफे में एकत्रित करना है। उसके बाद आटो क्लेव मशीन से 121 डिग्री तापमान देकर इस बुरादे को रोगाणु रहित किया जाता है। एक घंटे तक इस बुरादे को गर्मी दी जाती है।
-इसके बाद इस बुरादे को ठंडा करके इसमें शिटाके मशरूम का बीज लगाया जाता है। बीज लगाने के बाद नमी का विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए। 70 से 90 दिन में यह मशरूम तैयार हो जाती है। शिटाके मशरूम का बीज एचएयू में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। विशेषज्ञों की मानें तो एक किलो मशरूम का उत्पादन लागत करीब 150 रुपये आएगी।
——-
मार्केट में आसानी से उपलब्ध है ऑटो क्लेव मशीन
-ऑटो क्लेव मशीन मार्केट में आसानी से मिल जाती है। इसकी छोटी मशीन की कीमत डेढ़ लाख से शुरू है। इसी मशीन के जरिये लकड़ी के बुरादे को रोगाणु रहित किया जाता है। यह प्रेशर कुकर की तरह काम करती है।

Related posts

Leave a Comment