डोली गांव देहातों से उठी, दुल्हनें अब विदा होती हैं लक्जरी गाडिय़ों में

शहारी क्षेत्र से नई नवेली दुल्हन को मैके से ससुराल ले जानी वाली डोली जमाने के साथ इतिहास में तब्दील हो चुकी है। इसके साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण अंचलों में भी डोली से विदा करने का रिवाज करीब-करीब खत्म सा हो गया है। डोली से शादी की रस्म अदायगी परक्षावन किया जाता था। महिलाएं एकत्रित होकर मांगलिक गीत गाते हुए गांव के देवी-देवताओं के यहां माथा टेकाते हए दूल्हे, दुल्हन को उनके ससुराल भेजती थीं। एक समाचार एजेंसी की मानें तो, डोली की सवारी भारत…

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