स्ट्राबेरी हब बन गया है भिवानी जिले का गांव चनाना

चण्डीगढ़- राष्ट्रीय राजधानी, दिल्ली से लगभग 140 किलोमीटर दूर स्थित भिवानी जिले का गांव चनाना, जो स्ट्राबेरी का हब बन गया है। बागवानी विभाग की जागरूकता के चलते यहां का किसान परंपरागत खेती की बजाए बड़े पैमाने पर बागवानी को अपना रहे हैं। परिणाम स्वरूप यहां की स्ट्राबेरी हरियाणा के अलावा देश की राजधानी दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब में अमृतसर,फिजिल्का, अबोहर, भठिंडा, राजस्थान में जयपुर की मंडियों में पहुंच रही है। उत्तम किस्म व पैदावार के मामले में स्ट्राबेरी की हम बात करें तो देश में महाबलेश्वर के बाद दूसरे नंबर पर पहचान गांव चनाना को मिली है।
मिट्टी व पानी की तासीर के मद्देनजर यहां के किसानों ने परपंरागत खेती की बजाय बागवानी को अपनाया है। यहां किसान स्ट्राबेरी के साथ-साथ फूलों की खेती भी कर रहे हैं। परिणाम स्वरूप भिवानी की स्ट्राबेरी देश की है।

केलिफोर्निया और स्पेन से आते हैं पौधे
स्ट्राबेरी के मदर प्लांट केलिफोर्निया और स्पेन से प्रजाति की स्ट्राबेरी यहां पर तैयार की जाती है। पूना मंडी से इनके मदर प्लांट यहां लाए जाते हैं। एक मदर प्लांट से 20 से 25 रनर प्लांट तैयार हो जाते हैं। एक मदर प्लांट की कीमत करीब 40 रुपए होती है। एक रनर प्लांट से 300 ग्रा. से एक कि.ग्रा.तक स्ट्राबेरी की उपज होती है। यहां किसान माईक्रो इरीगेशन और ड्रिप सिस्टम से खेती कर रहे हैं। गांव चनाना व आसपास क्षेत्र में करीब 150 एकड़ में स्ट्राबेरी की पैदावार हो रही है।
परपंरागत खेती को छोड़ बागवानी कर रहे गांव चनाना के प्रगतिशील युवा किसान राजेश गोस्वामी ने बताया कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से बागवानी विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनिल गोदारा के संपर्क आकर उन्होंने स्ट्राबेरी की खेती शुरू की। उन्होंने बताया कि उन्होंने तीन एकड़ में किन्नू, दो एकड़ में अमरूद और छह एकड़ में स्ट्राबेरी की खेती की है। दो एकड़ में फूलों की खेती की है। वे परंपरागत खेती से कहीं अधिक बागवानी से पैदावार रहे हैं। वे स्वयं इसकी पैकिंग करते हैं और मंडियों तक पहुंचाते हैं।

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